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Chhatrapati Shivaji Jayanti : जानिए शिवाजी कैसे बने छत्रपति शिवाजी ? 15 साल की उम्र में ही कर डाले थे बड़े-बड़े कारनामे

Chhatrapati Shivaji Jayanti: जब भी भारतीय इतिहास के महान राजाओं की बात होती है तो छत्रपति शिवाजी का नाम सभी को याद आता है. वह एक वीर योद्धा कुशल शासक और , सैन्य रणनीतिकार और मराठा साम्राज्य के संस्थापक द शिवाजी की वीरता के कई किस्से हैं.आज हम आपको उन्हीं के बारे में कुछ खास बताने वाले हैं.

शिवाजी को हम क्यों याद करते हैं और शिवाजी कौन थे बचपन में ही हम शिवाजी के बारे में पढ़ते आ रहे हैं. वह महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता साम्राज्य के संस्थापक और मराठा साम्राज्य के प्रथम छत्रपति थे. उन्होंने छोटी सी उम्र में ही कई चुनौतियों का सामना किया और कई सारे युद्ध भी लड़े. आज 19 फरवरी 2024 को शिवाजी की जयंती है.
शिवाजी का जन्म

शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग, पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उनका पूरा नाम शिवाजी राजे भोंसले था। उनके पिता का नाम शाहाजी और माता का नाम जीजाबाई था। शिवाजी पर उनकी मां के धार्मिक गुणों का गहरा प्रभाव था। शिवाजी की शिक्षा

शिवाजी के प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई उन्होंने धार्मिक राजनीतिक और युद्ध की शिक्षा ली थी शिवाजी की मां जीजाबाई और कोंडदेव ने उन्हें महाभारत, रामायण और अन्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों का पूरा ज्ञान दिया। उन्होंने बचपन में ही राजनीति और युद्ध नीति सीख ली थी। उनका बचपन राजा राम, गोपाल, संतों तथा रामायण, महाभारत की कहानियों और सत्संग के बीच बीता। वह सभी कलाओ में माहिर थे। शिवाजी की पत्नी और बच्चे

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बताया जाता है कि शिवाजी की कई पत्नियों थी. उनकी पहली शादी 14 में 1640 में सईबाई निंबालकर के साथ हुई थी। तब शिवाजी की उम्र 10 साल थी। इसे शिवाजी के चार बच्चे हुए थे। उनकी दूसरी पत्नी का नाम सोयराबाई मोहिते था, जो काफी चर्चित महिला थीं। हालांकि शिवाजी की और पत्तियों के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी मौजूद नहीं हुई है शिवजी की मृत्यु के बाद उनका उत्तराधिकार संभाजी को मिला जो शिवजी के सबसे बड़े बेटे थे. शिवाजी द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध

तोरणा फोर्ट की लड़ाई (1645) पुणे में स्थित तोरणा किला प्रचंडगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। 1645 में हुई इस लड़ाई का हिस्सा शिवाजी भी बने थे तब उनकी उम्र केवल 15 साल की थी अपनी छोटी सी उम्र में उन्होंने अपना युद्ध कौशल दिखाया और इस किले पर जीत हासिल की थी

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प्रतापगढ़ का युद्ध (1659)

यह युद्ध महाराष्ट्र के सितारा के पास प्रतापगढ़ जिले में हुआ था इस युद्ध में शिवाजी ने आदिलशाही सुल्तान साम्राज्य पर आक्रमण किया और प्रतापगढ़ जिले पर जीत हासिल की ।
पवन खींद की लड़ाई (1660)

महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पास विशालगढ़ किले की सीमा में युद्ध बाजी प्रभु देशपांडे और सिद्धि मसूद आदिलशाही के बीच यह युद्ध हुआ था ।
सूरत का युद्ध (1664):

गुजरात के सूरत शहर के पास ये युद्ध छत्रपति शिवाजी महाराज और मुगल सम्राट इनायत खान के बीच लड़ा गया। शिवाजी की जीत हुई।
पुरंदर का युद्ध (1665)

इसमें शिवाजी ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी और लड़ाई में जीत भी हासिल की

सिंहगढ़ का युद्ध (1670)

इसे कोंढाना के युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। मुगलों के खिलाफ लड़कर शिवाजी की फौज ने पुणे के पास सिंहगढ़ (तत्कालीन कोंढाना) किला जीता था।
संगमनेर की लड़ाई (1679)

मुगलों और मराठाओं के बीच लड़ी गई ये आखिरी लड़ाई थी जिसमें मराठा सम्राट शिवाजी लड़े थे।
शिवाजी को छत्रपति की उपाधि कैसे मिली?

शिवाजी को अपने जीवन काल में कई सारी उपाधियां मिली 6 जून 1674 को रायगढ़ में उन्हें किंग ऑफ मराठा से नवाजा गया इसके अलावा छत्रपति क्षत्रिय कुलवंतस, हिन्दवा धर्मोद्धारक जैसी उपाधियां उनकी वीरता के कारण दी गईं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं- आदिलशाह का षड्यंत्र:

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बीजापुर के शासक आदिलशाह ने एक षड्यंत्र के तहत उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बनाई। इसमें शिवाजी तो बच गए, लेकिन उनके पिता शाहाजी भोसले को आदिलशाह ने बंदी बना लिया। शिवाजी ने हमला करके पहले अपने पिता को मुक्त कराया। फिर पुरंदर और जावेली के किलों पर भी अपना अधिकार कर लिया।

उन्होंने मुगलों के खिलाफ कई जंग लड़ी और जीतीं। उनकी गुरिल्ला युद्ध कला दुश्मनों पर भारी पड़ती थी। उनकी नीतियों, सैन्य योजनाओं और युद्ध प्रतिभा की वजह से सब उनका लोहा मानते थे। उनकी शक्तिशाली सेना की वजह से वे महाराष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता बने।

औरंगजेब का धोका: औरंगजेब ने शिवाजी को धोके से कैद कर लिया था। लेकिन अपनी अक्लमंदी और चतुराई से वे कैद से छूट गए और फिर औरंगजेब की सेना के खिलाफ युद्ध किया। पुरंदर संधि के तहत दिए हुए 24 किलों को वापस जीत लिया।3 अप्रैल 1680 को महान छत्रपति शिवाजी की मृत्यु हो गई।