कोर्ट-कचहरी हो जाएगी बंद? अब ये मशीन मुकदमा सुनकर चुटकी में देगी फैसला

आज जबकि हर चीज चुटकी बजाते ही हासिल है वही अभी भी कुछ चीजें है जिन्हे पाने में काफी अधिक मशक्त करनी पड़ती है, जैसे अदालत के मामलों को सुलझाने में काफी वक्त लगता है। खासकर बात अगर भारत के संदर्भ में की जाये तो देश की अदालतों में करोड़ों मामले आज लंबित हैं। जबकि कोर्ट के फैसला से किसी की जिंदगी या मौत जुड़ी होती है साथ ही इस काम में काफी सूझबूझ के साथ-साथ धैर्य की भी जरूरत होती है।

इसलिए पड़ोसी देश चीन ने दुनिया का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) पावर्ड प्रोसिक्यूटर तैयार किया है जो चुटकियों में फैसला सुनाने की काबिलियत रखता है। सॉफ्टवेयर को तैयार करनी वाली कंपनी के अनुसार यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो सामने पेश किए गए तर्कों और दलीलों को सुनकर अपना फैसला बताने की काबिलयत रखता है। इसके साथ ही, यह दावा भी किया गया है कि ट्रायल के दौरान इसके फैसले 97 फीसदी तक सटीक मिले हैं।

कोर्ट-कचहरी हो जाएगी बंद? अब ये मशीन मुकदमा सुनकर चुटकी में देगी फैसला
Artificial Intelligence

‘डेली स्टार’ की खबर के अनुसार चीन की टेक कंपनी का दावा है कि यह मशीन दलीलों को सुनकर 97 फीसदी सटीक फैसला सुना सकती है। वाकई अगर ऐसा सच में मुमकिन हुआ तो चीन में आने वाले वक्त में कोर्ट-कचहरी की जरूरत ही नहीं रहेगी और जजों का काम सॉफ्टवेयर की मदद से किया जायेगा।

कंपनी जिसने उक्त सॉफ्टवेयर को तैयार किया है ने बताया कि यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो सामने पेश किए गए तर्कों और दलीलों को सुनकर अपना फैसला बता सकता है। इस मशीन को शंघाई की कंपनी पुडॉंग पीपुल्स प्रोक्यूरेटोरेट की ओर से तैयार किया गया है। यह मशीन जजों की कमी और अदालती फैसलों में होने वाली देरी को कम करेगी। साथ ही, जरूरत होने पर इसे अदालती कार्यवाही में भी शामिल किया जा सकता है।कंपनी के अनुसार इस मशीन में बहुत बड़ी मात्रा में डेटा सेव किया जा सकता है साथ ही डेस्कटॉप कम्प्यूटर के जरिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

कंपनी के अनुसार इसे तैयार करते वक्त साल 2015 से 2020 के कानूनी मामलों का सहारा लिया गया था। इस मशीन ने बैंक फ्रॉड से लेकर सट्टेबाजी और ड्राइविंग रूल के मामलों में सटीक फैसले सुनाए।वही, कंपनी के तमाम दावों के विपरीत इस मशीन की आलोचना भी जारी है। चूँकि कानूनी फैसले काफी संवेदनशील होते हैं इसलिए मशीन का सहारा लेना उचित नहीं है। साथ ही, कई बार फैसले देते वक्त सबूतों के अलावा भावनाओं और हालात का जायजा भी लेना होता है, मशीन ऐसा कतई नहीं कर सकती, जिसे लेकर लोगों के मन में शक है।

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