Advertisement
Categories: Politics

बिहार असेंबली चुनाव 2020 : आखिर क्यों टेंशन दे रहे चिराग पासवान नीतीश को !

लोक जन शक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान (LJP President Chirag Paswan) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर लगातार सवाल खड़े करने और बीजेपी (BJP) के प्रति सॉफ्ट रहने पर सवाल खड़े हो गए हैं ।

आखिर चिराग के मन मे क्या है? बार-बार पार्टी की बैठकें करने के बाद भी चिराग पासवान अपना स्टैंड क्यों नहीं साफ कर रहे हैं? बीजेपी से दोस्ती और नीतीश के बैर के क्या मायने हैं? एलजेपी बिहार में एनडीए के साथ रहेगी या नहीं? ऐसे में सवाल उठता है कि जेडीयू पर क्या प्रेशर पॉलिटिक्स बनाए रखने के लिए चिराग तेवर दिखा रहे हैं?लेकिन, क्या चिराग तेवर से बिहार बीजेपी सहज है? कम से कम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल के बयान से तो नहीं लगता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल से पूछा तो उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि चिराग क्या बोलते हैं, वो सवाल उन्हीं से पूछिये।

वही बीजेपी की तरफ से चिराग को एक बड़े नेता का साथ मिलता दिख रहा है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता आर के सिंह ने एनडीए गठबंधन में कोई परेशानी नहीं है। हम सभी पार्टियां एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगी। एलजेपी और चिराग़ भी हमलोगों के परिवार के सदस्य की तरह हैं और हम पार्टनर भी हैं।समय-समय पर जनता की आवाज़ उठाते रहते हैं, पर इससे हमारे बीच में कोई दुराव नहीं है।

आरके सिंह ने कहा कि परिवार के किसी सदस्य को लगता है कि कोई बिंदु ओवरलुक हो रहा है तो उसका अधिकार है कि सबका ध्यान आकृष्ट हो। यही काम चिराग़ पासवान कर रहे हैं। इसी लाइन पर बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि एनडीए में सब ठीक है और सभी मिलकर 200 से ज्यादा सीट जीतेंगे। वहीं, जेडीयू प्नवक्ता राजीव रंजन ने भी चिराग पर साफ बोलने से इनकार करते हुए सबकुछ ठीक होने कई बात कही है।

जाहिर है ये साफ है कि कोई भी पार्टी अलग नहीं होना चाहती, लेकिन मामला अधिक से अधिक दावेदारी और हिस्सेदारी की ही है। पर सवाल ये भी है कि आखिर चिराग पासवान क्यों गठबंधन को लेकर पीएम मोदी और बीजेपी पर सब छोड़ रहे हैं। चिराग की इस राजनीति को कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने भाजपा की चाल बताते हुए कहा है कि चिराग बीजेपी के इशारे पर सबकुछ कह रहे हैं। हालांकि राजनीतिक जानकार अंदरखाने की कुछ और ही कहनी कहते हैं।

दरअसल, 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार महागठबंधन से लड़े थे। ऐसे में एनडीए की सीट शेयरिंग में एलजेपी को 42 सीटें मिली थीं।चिराग इस बार भी इतनी ही सीटों पर चुनावी दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन सीएम नीतीश की सहमति नहीं है क्योंकि बिहार की 243 सीटों में से बीजेपी 100 और पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है तो जेडीयू भी 110 से 120 सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही है।ऐसे में एनडीए में जीतनराम मांझी और चिराग पासवान की पार्टी बचती है।

दूसरी ओर एनडीए की सीट शेयरिंग में मांझी की उलझन भी आ गई है। गौरतलब है कि जीतनराम मांझी को नीतीश लेकर आए हैं तो उन्हें साधकर रखने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। माना जा रहा है कि वो अपने कोटे से ही मांझी को सीटें देंगे. वहीं, एलजेपी को लेकर मामला उलझा हुआ है। माना जा रहा है कि इस बार एलजेपी को महज दो दर्जन सीटों पर ही चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है।

Leave a Comment
Advertisement

This website uses cookies.