Advertisement
Categories: देश

West Bengal Election 2021:क्यों नाराज हैं शुभेंदु अधिकारी, क्या होगा असर? 4 प्वाइंट में समझें पूरा मामला

गुरुवार को मेगा रैली में शुभेंदु ने कहा कि किसी ने न उनका चयन किया है और ना ही नामित किया है, बल्कि वह एक निर्वाचित नेता हैं. (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल (West Bengal Election 2021) में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की टीएमसी (TMC) में सियासी उठा-पटक होने के संकेत मिल रहे हैं. हालिया मामला ममता सरकार में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) का है, जो लगातार बागी तेवर अख्तियार किए हुए हैं. हाल ही में उन्होंने कहा कि वे कड़ी मेहनत से ऊंचाई पर पहुंचे हैं और किसी ने न उनका चयन किया है और ना ही नामित किया है, बल्कि वह एक निर्वाचित नेता हैं. बता दें कि शुभेंदु पिछले कुछ समय से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) और राज्य मंत्रिमंडल से दूरी बनाकर चल रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में क्या होगा अगर वे तृणमूल से अलग हो जाते हैं? आइए 4 प्वाइंट में समझते हैं पूरा मामला…

1. क्यों नाराज हैं शुभेंदु?
शुभेंदु अधिकारी के नाराजगी की असली वजह तो अबतक सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक पंडितों की मानें तो शुभेंदु, ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी से नाराज चल रहे हैं. इसके अलावा, जिस तरह से प्रशांत किशोर ने बंगाल में संगठनात्मक बदलाव किया है, उससे भी वह नाखुश हैं. इससे शुभेंदु को ऐसा महसूस हो रहा है कि पार्टी में अब उनकी उपेक्षा हो रही है. उनके करीबियों का मानना है कि लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा में पार्टी बुरा प्रदर्शन न करें, इसके लिए वे 65 विधानसभा सीटों पर अपनी पसंद के उम्मीदवारों को मैदान में उतारना चाहते हैं. हालांकि, इन सब बातों को लेकर अभी सकारात्मक संदेश नहीं मिले, जिससे शुभेंदु की नाराजगी बढ़ती जा रही है.

2. लेफ्ट के गढ़ में ममता को दिलवाई थी जीतनंदीग्राम कभी लेफ्ट का गढ़ हुआ करता था, लेकिन जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की नींव शुभेंदु अधिकारी ने ही तैयार की थी. वे इस आंदोलन में ममता बनर्जी के सेनापति की भूमिका में थे, जिसकी वजह से लेफ्ट के इस गढ़ में टीएमसी की जीत हुई. ऐसे में कई सवाल कौंध रहे हैं, जिसमें से प्रमुख है कि कभी नंदीग्राम में ममता बनर्जी के लिए सिपाही की भूमिका निभाने वाले शुभेंदु अधिकारी आखिर अब बागी क्यों हो गए हैं? क्या पार्टी में उनकी नहीं सुनी जा रही है, जिससे वे नाराज हो गए?

3. क्या भाजपा के साथ जा सकते हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो शुभेंदु अधिकारी भाजपा के साथ जा सकते हैं. वे बीजेपी के टॉप लीडर्स से संपर्क में भी हैं. लेकिन दोनों तरफ से इस बारे में आधिकारिक बयान नहीं है. इससे इतर, गुरुवार को ईस्ट मिदनापुर जिले के रामनगर में आयोजित मेगा रैली उन्होंने TMC से अपनी नाराजगी के बारे में भी कुछ नहीं कहा. हालांकि, उन्होंने इशारों-इशारों में प्रशांत किशोर पर निशाना जरूर साधा. उन्होंने कहा कि मैं मौसम विशेष में आने वाली चिड़िया नहीं हूं, मैं 24*7 घंटे काम करने वाला कार्यकर्ता हूं और हमेशा ऐसा करता रहूंगा. पार्टी से मतभेद के बारे में उन्होंने कहा कि हमारे विचारों में मतभेद जरूर है, लेकिन वह कोई बड़ी बात नहीं है. वहीं, मीडिया पर निशाना साधते हुए शुभेंदु ने कहा कि चैनल वाले सिर्फ टीआरपी के लिए ऐसा कर रहे हैं, जबकि मैं आज भी किसी पार्टी का प्राथमिक सदस्य हूं.

4. फायदा तो भाजपा को ही होगा…
चुनाव सिर पर है, मगर पश्चिम बंगाल सरकार में परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बागी तेवर अपना कर ममता बनर्जी को एक नई टेंशन दे दी है. यह टेंशन भी ऐसी है कि ममता की करीब 20 सीटें प्रभावित हो सकती हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अगर शुभेंदु भाजपा के साथ जाते हैं तो TMC को इन सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है और यहां बीजेपी को बढ़त हासिल हो सकती है. हालांकि, शुभेंदु अगर बीजेपी के साथ नहीं जाते हैं और उनकी नाराजगी ऐसे ही जारी रहती है तो भी इसका फायदा बीजेपी उठा सकती है.


Source link

Leave a Comment
Advertisement

This website uses cookies.