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भारतीय सेना का वह कप्तान जो जान-बूझकर जहाज संघ डूब गया, जाने एक वीर की शौर्य गाथा

9 दिसंबर 1971को एक जहाज डुबने की कहानी था, लेकिन यह कहानी सिर्फ फिर जहाज डूबने की नहीं है। आपको बता दें कि कप्तान महेंद्रनाथ मुल्ला की दी हुई सहादत की कहानी है। 45 साल पहले हुई उस जंग में जिंदा एक नौसैनिक का बयान था, भारतीय नौसेना के दो जहाजों INS कृपाण और INS खुकरी को आदेश मिला कि पाकिस्तानी पनडुब्बी हंगोर को मार गिराया जाए।

दोनों जहाजों के कमांडिंग अफसर महेंद्रनाथ मुल्ला खुद INS खुकरी पर मौजूद थे। अरब सागर में दीव के पास ये ऑपरेशन शुरू हुआ।ब्रिटिश काल की यह दोनों जहाज फ्रांस से मंगाई गई (हंगोर) सबमरीन के मुकाबले तकनीकी तौर पर बहुत पिछड़े हैं। भारतीय नौसैनिक जानते थे कि मुकाबला बराबरी का नहीं है,पर जंग में यह नियम शर्त नहीं होती।

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पाकिस्तानी पनडुब्बी बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ती रही, करीब शाम 7:57 पर उसने INS कृपाण पर पहला टारपीडो फायर किया, कृपान के फटने से पहले ही उसको देखकर एंटी सबमरीन मोटाॅर से उसे नष्ट कर दिया। खुकरी ने अपनी स्पीड बढ़ाई और हंगोर की तरफ बढ़ी। हंगोर ने इसी तरह दूसरा टारपीडो फायर किया जो सीधे खुकरी के ऑयल टैंक में लगे जहाज में तुरंत आग लग गई।

पाकिस्तानी सबमरीन के कप्तान कमांडर अहमद तस्नीम ने दावा किया था कि जहाज कुल 2 मिनट में डूब गया, जबकि सारी रिपोर्ट कहती है कि खुकरी को डुबोने के लिए बाद में 2 टाॅरपीडो और फायर करने पडे, उधर कृपाण को एक और टारपीडो लगा जिससे उसका हल टूट गया और वह बीच समुंदर में एक जगह और असहाय खड़ा हो गया।

खुकडी को डूबता देख कैप्टन मुल्ला ने बिना किसी पैनिक के नौसैनिकों को जहाज छोड़ने का आदेश दिया। कप्तान ने अपनी लाइफ जैकेट भी किसी दूसरे नौसैनिकों को दे दी और अपनी कुर्सी पर बैठे आदेश देते रहें। जिम्मेदारी लेते हुए कैप्टन मुल्ला ने भी जल समाधि ले ली।

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