बदलते भारत की बदलती तस्वीर देख लोग सराहते हुए पूछ रहे हैं – क्या देखी है देश में पहले ऐसी तस्वीर !

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पिक्चर ऑफ द डे… राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में सम्‍मानित की गईं कर्नाटक की 72 वर्षीय आदिवासी महिला तुलसी गौड़ा जिनका अभिवादन पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हाथ जोड़ कर करते हुए नजर आ रहे हैं। आखिर ये तुलसी गौड़ा हैं कौन जिनका नाम अब पूरी की पूरी दुनिया आदर से ले रही है। पद्म पुरस्कार से सम्‍मानित किए जाने पर बहुत लोग उनके बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। 

बदलते भारत की बदलती तस्वीर : जब जेएनयु में गुँजा भारत माता की जय! - Kreately
बदलते भारत


पर्यावरणविद तुलसी गौड़ा वर्ष 2020 के लिए 119 पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में से एक है। समारोह में इन्होंने पारम्परिक वेशभूषा में पुरुस्कार ग्रहण किया है। नंगे पैर वाली इस महिला का अभिवादन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शीर्ष मंत्रीगण और गणमान्य व्यक्तियों के द्वारा करते हुए तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल काफी तेजी से हो रही है। जिसके बाद बहस शुरू हो गई है। लोग इस तस्वीर को नए भारत की तस्वीर बता रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं – क्या देश में कभी कॉमन मैन को विशिष्ट कार्यों के लिए इस तरह से विशिष्ट पदक देकर उनका सम्मान किया गया।अधिकांश लोग इससे बेहद ही सराह रहे हैं। वहीं एक तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरणविद का हाथ पकड़ कर बातें करते हुए भी देखा गया। 


दरअसल उन्‍हें पर्यावरण की सुरक्षा में उनके योगदान के लिए सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नंगे पैर रहने वाली और जंगल से जुड़ी तमाम जानकारियां रखनी वालीं तुलसी गौड़ा हजारों पेड़-पौधे लगा चुकी हैं। कर्नाटक के गरीब परिवार में जन्मी तुलसी गौड़ा कर्नाटक के ही हलक्की स्वदेशी जन-जाति से ताल्लुक रखती हैं। वह पारंपरिक पोशाक पहनती हैं। उनका परिवार इतना गरीब है कि वे पढ़ भी न पाईं। उनके यहां जीविका चलाना भी मुश्किल भरा होता है। ऐसे में उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की, किंतु फिर भी, उन्हें आज ‘इनसाइक्‍लोपीडिया ऑफ फॉरेस्‍ट’ (वन का विश्वकोश) के रूप में जाना जाता है। ऐसा पेड़-पौधों व जड़ी-बूटियों की विविध प्रजातियों के उनके विस्‍त़त-ज्ञान के कारण है। 
वह 12 साल की उम्र से अपने यहां पेड़-पौधे लगा रही हैं। अब तक उन्होंने हजारों पेड़ लगाए और उनका ख्याल रखते हुए उन्‍हें बड़ा किया। बताया जाता है कि, वह एक अस्थायी स्वयंसेवक के रूप में भी वन विभाग में शामिल हुईं, जहाँ उन्हें प्रकृति संरक्षण के प्रति समर्पण के लिए जाना जाने लगा। बाद में उन्हें विभाग में स्थायी नौकरी की पेशकश की गई।

आंध्र-प्रदेश के भाजपा प्रमुख विष्‍णु वर्धन रेड्डी ने कहा कि, आज, 72 साल की उम्र में भी, तुलसी गौड़ा पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने के लिए पौधों का पोषण करना और युवा पीढ़ी के साथ अपने विशाल ज्ञान को साझा करना जारी रखे हुए हैं। उन्‍होंने कहा कि, तुलसी गौड़ा एक गरीब और सुविधाओं से वंचित परिवार में पली-बढ़ीं। बावजूद इसके उन्‍होंने हमारे जंगल का जैसे पालन-पोषण किया है।


आदिवासी होने की वजह से भी लगाव ज्‍यादाविष्‍णु वर्धन रेड्डी ने ट्वीट कर कहा कि, वह एक आदिवासी-पर्यावरणविद् हैं, जिन्होंने 30,000 से अधिक पौधे लगाए हैं और पिछले छह दशकों से पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में शामिल हैं। वहीं, राष्‍ट्रपति भवन की ओर से भी बताया गया कि, तुलसी गौड़ा को उनके सामाजिक कार्यों और पयार्वरण के प्रति उनके योगादान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

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