देश

शादी के 18 दिन बाद ही देश के लिए शहीद हो गया राजस्थान के सौरव कटारा,जन्मदिन के दिन ही दी सहादत

Advertisement

राजस्थान के भरतपुर इलाके में माहौल बहोत गमगीन है।राजस्थान का एक बेटा देश की सेवा के लिए शहीद हो गया। सौरभ कटारा महज 22 साल की उम्र में ही देश की सेवा करते करते शहीद हो गए। उनकी ड्यूटी जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थी। मंगलवार की रात को बम ब्लास्ट में वह शहीद हो गए। सौरव कटारा की शादी के महज 18 दिन बाद ही वह शहीद हो गए,, उनकी शादी 8 दिसंबर को हुई थी, और शादी के बाद वह 16 दिसंबर को अपनी छुट्टियां बिताकर वापस से अपनी ड्यूटी के लिए कुपवाड़ा चले गए थे।

सौरभ की पत्नी उनकी बर्थडे पर उन्हें विश करना चाहती थी लेकिन उन्हें क्या पता था कि वह जन्मदिन की बधाई नहीं दे सकेंगी और मौत की खबर ही सुनने को मिलेगा। अपने देश के लिए शहीद होने वाले सौरव कटारा का बुधवार को जन्मदिन भी था, उनका परिवार उनके जन्मदिन की तैयारियों में लगा हुआ था, इतने में सौरव की मौत की खबर ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया।परिवार पर तो दुःख का पहाड़ ही टूट गया। सौरव कटारा की अंतिम विदाई देने के लिए हजारों संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा, और हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीद सौरभ को अंतिम विदाई दी।

यह भी पढ़ें-  I will can Go to jail and Hanging for Ayodhya case but will not take bail says, Uma Bharti | उमा भारती ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, बोलीं

इस मौके पर शहीद की पत्नी पूनम देवी का रो रो कर बुरा हाल था, वह भी अपने शहीद पति को अंतिम विदाई देने के लिए शमशान तक पहुंची थी। वही शहीद के पिता नरेश कटारा वह दोनों भाई और मां सहित दादा दादी का भी रो-रोकर बुरा हाल था। पूनम देवी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि कुछ दिन पहले उनका पति उनसे जल्दी आने का वादा किया था। मगर किसे पता था कि ऐसा हो जाएगा।

शहीद सौरभ की पत्नी पूनम देवी तो बार-बार बेहोश हो रही थी। मगर हिम्मत के साथ वह शमशान तक पहुंची और अपने पति की अंतिम विदाई भी की। शहीद सौरभ कटारा के पिता नरेश कटारा खुद भी आर्मी में थे, जो 2002 में सेवानिवृत हो गए थे । उन्होंने 1999 में कारगिल युद्ध में भाग लिया था। साथ ही सौरव का बड़ा भाई गौरव कटारा खेती करता है। और छोटा भाई अनूप कटारा एमबीबीएस कर रहा है। सौरभ आर्मी से छुट्टी लेकर विगत 20 नवंबर को अपनी बहन दिव्या की शादी में आया था।

यह भी पढ़ें-  Hearing in Sri Krishna Janmabhoomi case postponed till 30 September | श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में अदालत नहीं पहुंचे याचिकाकर्ता, सुनवाई 30 सितंबर तक टली

और बाद में फिर 8 दिसंबर को उसकी खुद की शादी थी। इसीलिए वह बहन और अपनी शादी करने के बाद 16 दिसंबर को वापस छुट्टी काट कर अपने ड्यूटी पर चले गए थे। पूनम की हाथों की मेहंदी अभी सूखी भी नहीं थी कि उनके पति के शहीद होने की खबर आई। शहीद के पिता नरेश कटारा ने बताया कि मैंने आर्मी में रहकर खुद कारगिल युद्ध लड़ा है। मुझे गर्व है अपने बेटे पर जो अपने देश की सेवा के लिए शहीद हो गया। मैं अपने छोटे बेटे को भी आर्मी में ही भेजूंगा ताकि वो भी अपने देश की सेवा और रक्षा कर सकें।

Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ट्रेंडिंग न्यूज़

To Top