रानी कमलापति अपने पति के दोस्तों से आबरू बचाने के लिए लिया था जल समाधि।

गोंड जनजाति से आने वाली वीर,निडर और साहसी रानी कमलापति 18 वीं शताब्दी में क्षेत्र कि रानी थी, गोंड शाशक निज़ाम उनके पति थे। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्तिथ हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर उन्हीं के पति के नाम पर रखा जाएगा। ये वही रानी है,जिन्होंने अफगानों के दोस्त मोहम्मद से अपनी आबरू बचाने के लिए जल समाधि ले ली थी।रानी कमलापति निज़ाम शाह की सात पत्नियों में से एक थी और उनकी सुंदरता और गुणवत्ता पर पूरा क्षेत्र मोहित था। भोपाल के अंतिम गोंड राजा नरसिंह देवड़ा थे,उन्होंने भोपाल में 60 वर्षों तक शासन किया। 16 वीं शताब्दी में, देहलवारी, भोपाल से 55 किलो मीटर दूर 750 गांव को मिला एक राज्य गितौड़गढ़ बनाया गया। जिसके राजा सूर्य सिंह शाह थे ,उन्हे के पुत्र थे निज़ाम शाह। राजा ने 1700 ई में रानी के प्रेम प्रतीक के रूप में एक सात मंज़िल महल बनवाया था। शिवराज सिंह चौहान अपने एक लेख में इस महल की भव्यता के बारे में बताते हैं । राजा निज़ाम और रानी कमलापति का एक पुत्र भी था जिसका नाम नवल शाह था ।

दोस्त मोहम्मद से आबरू बचाने को ली जल समाधि, जानें कौन थीं रानी कमलापति AAJ  KI NEWS
rani kamlavati

राजा को मारने की होने लगी साजिश

राजा का एक भतीजा ,चैन सिंह रानी पे मोहित था। और उनसे विवाह करना चाहता था जिसके लिए कई बार उसने राजा को मारने कि कोशिश की पर नाकाम रहा फिर एक दिन उसने मौका देख निजामशाह को भोजन पे बुलाया और भोजन में जहर दे दिया और गीतौड़गढ़ के किले पर हमला कर दिया। रानी अपने बेटे के साथ महल में छुप गई थी ।

रानी पर मोहित था मोहम्मद

रानी को जब खबर मिली की अफ़गानीयो ने गितौड़गढ को अपना अड्डा बना लिया है तब रानी ने अफ़गान के सेनापति दोस्त मोहम्मद से अपने और अपने बेटे के लिए मदद मांगी। पर हुए यूं कि जिससे उन्होंने मदद मांगी उसी ने गीतौड़गढ पे हमला कर दिया और यही नहीं वो राज्य के साथ रानी को भी पाना चाहता था। इसका पता जब उनके बेटे को चला तो उसने युद्ध किया पर हार गया ।जब रानी को पता चला कि उनके बेटे को मार दिया गया है तो उन्होंने अपनी आबरू बचाने के लिए जल समाधि लेना उचित समझा। रानी की मृत्यु के बाद मोहम्मद पूरे भोपाल का नवाब बन गया और इसी के साथ नवाबों का दौर शुरू हुआ।

Facebook Comments Box