Mahakal mandir : महाकाल मंदिर में रोज 10 मिनट के लिए महिलाओं को दर्शन क्‍यों नहीं करने दिया जाता

भगवान महाकाल की भस्म आरती में दुनियाभर के शिव भक्तों की काफी आस्था है। शिव भक्त हमेशा भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होना चाहते हैं। इसीलिए भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग कई महीने पहले ही फुल हो जाती है। मान्यता है कि भस्म आरती में दर्शन करने मात्र से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है। इस वजह से देश भर से लाखों शिव भक्त साल भर भगवान महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने आते हैं।

Mahakal mandir
महिलाओं को दर्शन क्‍यों नहीं करने दिया जाता

ऐसी ही एक परंपरा भस्म आरती के दौरान निभाई जाती है, जब महिलाओं को 10 मिनट के लिए भगवान महाकाल के दर्शन करने की अनुमति नहीं होती है। इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है। मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में कई ऐसी रोचक परंपराएं हैं, जिनके बारे में जानने के लिए श्रद्धालु हमेशा उत्सुक रहते हैं।

बताया जाता है कि भगवान को भस्म में स्नान कराया जा रहा है और महिलाओं को अभी तक दर्शन की अनुमति नहीं है। 10 मिनट तक भगवान महाकाल को भस्म रमाई जाति है उस समय महिलाएं दर्शन नहीं कर सकती हैं। भस्म आरती के दर्शन के लिए देश भर से भक्त आते हैं, जब उस भस्म से भगवान महाकाल को स्नान कराया जाता है, उस समय महिलाएं भगवान महाकाल के दर्शन नहीं कर पाती हैं।

इसके बाद सुबह की आरती, भोग आरती, शाम की आरती और शयन आरती से भगवान महाकाल की पटियां बंद होती हैं। प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे से 11:00 बजे तक भगवान महाकाल भक्तों को दर्शन देते हैं। महिलाओं को इस दौरान सिर्फ 10 मिनट तक दर्शन नहीं करने को कहा जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर के पंडित का कहना है कि भगवान के स्नान के दर्शन महिलाएं नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वस्त्र बदलते हैं उसी प्रकार भगवान महाकाल निराकार रूप में आते हैं। इसी वजह से महिलाओं को कुछ मिनट के लिए घूंघट हटाने को कहा जाता है।

12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान महाकालेश्वर तीसरे स्थान पर हैं। भगवान महाकाल को अवंतिका की नगरी ही नहीं बल्कि ब्रह्मांड का राजा भी माना जाता है। प्रतिदिन प्रातः राजाधिराज भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। सबसे पहले भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है।

क्या होती है भस्म आरती? कैसे होती है ये आरती?

कहा जाता है कि महाकाल की भस्म आरती के लिए पलाश, बड़, शमी, पीपल, अमलतास, बैर वृक्ष की लकड़ी और उपले एक साथ जलाए जाते हैं। इस दौरान मंत्रों का जाप किया जाता है। फिर इसे साफ कपड़े से छानकर बाबा के श्रृंगार में लगाया जाता है।

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