भीख में मिली आज़ादी वाले बयान पर माफ़ी मांगने को राज़ी कंगना, बदले में रख दी ये साबित करने की शर्त

भीख में मिली आज़ादी वाले बयान पर अब कंगना माफ़ी मांगने को तो तैयार हो गयी है देश भर में विरोध का सामना करने के बाद पर उसके बदले में रखा दी है ऐसी शर्त। दरअसल कंगना के खिलाफ देश के कई शहरों में केस दर्ज हो चुका है। किन्तु कंगना है कि अभी भी मैंने को तैयार नहीं है। मालूम हो कि कंगना को अपने विवादित बयान के चलते चारोओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ तक कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक कंगना के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। पर अब लगता है ये विवाद सुलझने के बजाय अभी और कई नए रंग लेगा, दरअसल कंगना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये इस बयान पर प्रतिक्रिया दी और माफ़ी मांगने को तैयार हो गई,पर बदले में रख दी है ऐसी शर्त। जिसे जानकर लग रहा है कि कंगना अभी भी अपने बयान से शर्मिंदा नहीं हैं ।

kangana ranaut

तभी तो उन्होंने माफ़ी मांगने के लिए ऐसी शर्त रखते हुए कहा है कि, अगर कोई उन्हें गलत साबित कर देगा तो वे पद्म श्री भी लौटा देंगी।दरअसल कंगना रनोट ने अब इस विवा’द पर अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रतिक्रिया दी है।कंगना ने साफ कहा कि वो माफी मांगने और पद्मश्री वापस करने को तैयार हैं।मालूम हो कि, स्टोरी में कंगना ने एक किताब का एक अंश शेयर किया और लिखा, ‘सब कुछ बहुत स्पष्ट रूप से उसी इंटरव्यू में 1857 में उल्लेख किया गया है, स्वतंत्रता के लिए पहली सामूहिक लड़ाई… सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और वीर जैसे महान लोगों के बलिदान के साथ।सावरकर जी. 1857 मुझे पता है, लेकिन 1947 में कौन सा यु’द्ध हुआ था, मुझे पता नहीं है, अगर कोई मेरी जागरूकता बढ़ा सकता है तो मैं अपना पद्मश्री वापस दूंगी और माफी भी मांग लूंगी कृपया इसमें मेरी मदद करें।’

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अब कंगना के इस बयान को लेकर फिर से उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। चूँकि कंगना ने अपने आजादी वाले बयान पर 2014 में भारत को स्वतंत्रता मिलने वाली बात को सही ठहराते हुए, कंगना रनोट ने कहा, ‘जहां तक ​​​​2014 में आजादी का सवाल है, मैंने विशेष रूप से कहा था कि भौतिक आजादी हमारे पास हो सकती थी लेकिन भारत की चेतना और विवेक 2014 में मुक्त हो पाए। एक मृत सभ्यता जिंदा हुई और पंख फहराया और अब ग’र्ज’ना और ऊंची उड़ान भर रहा है।इसके बाद कंगना ने आगे कहा, ‘आज पहली बार ..अंग्रेजी में न बोलने या छोटे शहरों से आने या भारत में बने उत्पादों का उपयोग करने के लिए लोग हमें शर्मिंदा नहीं कर सकते, मैंने सबकुछ एक ही इंटरव्यू में साफ कर दिया था।

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