‘खड़े-खड़े रेप कर दूँगा, फाड़ कर चार कर दूँगा’ – ‘देवांशी’ को समीर अहमद की धमकी, दिल्ली दंगों वाला इलाका

Copy

दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित मौजपुर का मोहनपुरी इलाके से एक शर्मनाक घटना सामने आई है। मोहनपुरी इलाके मैं हिंदुओं की दो-तीन गलियां है जो मुस्लिमों की घनी बस्तियों से घिरी है। इसी इलाके में एक लड़की को मुस्लिम लड़के द्वारा खुलेआम रेप करने की धमकी दी जाती है और गंदी गालियां दी जाती है। इस शर्मनाक वाक्यांश के बावजूद भी मुस्लिम परिवार अपने लड़के को घर में छिपाकर कह रहा है लड़का है, गर्म खून है, निकल जाता है!”

इसके बावजूद जब पीड़िता न्याय के लिए उम्मीद में जाती है तो उस समुदाय विशेष के भीड़ के दबाव में आकर पीड़ित लड़की को ही प्रताड़ित किया जाए, आरोपी के बजाय पीड़िता पर ही दबाव बनाया जाए, तो पीड़ित लड़की कहां कहां किस-किस से लड़े। क्या यही हमारे देश की नारी सुरक्षा का प्रमाण है ?

पीड़िता को घंटों थाने में बैठाने के बाद अगर दबाव बनाया जाए कि समझौता कर लो, आगे से वह लड़का ऐसा नहीं कहेगा या कुछ नहीं करेगा अथवा कभी पीड़िता को ही जेल में डाल देने की धमकी दी जाए, तो ऐसी परिस्थिति में एक पीड़ित लड़की न्याय के लिए कहां जाएगी, वह भो तब जब वह अकेले परिवार संभालने वाली हो, पिता का साया सर से उठ चुका हो, भाई बाहर, घर में छोटी बहन और मां के साथ उस इलाके में रहती हो।

मोहनपुरी रेप धमकी
devanshi

इतना जानने के बाद आप लोग को कोई हैरानी नही हुई होगी, क्योंकि अब ऐसी घटनाओं के लोग आदि होते जा रहे हैं। फिर भी कुछ लोग मामले के बारे में जानने के लिए उत्सुक होंगे। आइए विस्तार से जानते हैं की यह मामला क्या है।


यह घटना मौजपुर के मोहनपुरी इलाके में हिंदू बहुल दो-तीन गलियों में से गली नंबर 8 में रहने वाली एक लड़की देवांशी (बदला हुआ नाम) के साथ हुई है।देवांशी 21 फरवरी 2020 की शाम अपने पालतू डॉगी के साथ घर से गली में घूमने निकलती है। गलती से वह गली नंबर 9 के उस मोड़ तक चल जाती है जहां मुस्लिम बहुल घनी बस्ती शुरू होती है। वही एक समीर अहमद नाम का मुस्लिम लड़का, जो बाइक से कहीं जा रहा था, उसके साथ बदतमीजी करने लगता है।

जब देवांशी उसे रूकती है तो उस लड़के ने कहा “अपने कुत्ते को यहां पेशाब मत करवाना नहीं तो मैं तुझे फाड़ कर चार कर दूंगा, तेरा खड़े-खड़े रेप कर दूंगा।” इस पर देवांशी लड़के का कालर पकड़ लेती है। देवांशी आरोपी समीर अहमद को पहचानती है, इसलिए अपनी शिकायत में नाम पता के साथ उल्लेख करती हैं, लेकिन शिकायत जब एफ आई आर में दर्ज हुई तो कई तथ्य गायब थे।

गौरतलब है कि यह घटना होने के बाद देवांशी घर से अपना फोन लेकर अपना शिकायत दर्ज कराने के लिए पी सी आर को कॉल करती हैं। जब पीसीआर जाती है तो उन्हें और उनकी मां को भजनपुरा थाने ले जाया जाता है। यहां थाने में करीब 3 घंटे बैठे रहने के बाद रात के 10:30 बजे उनकी शिकायत आई ओ मनोज भाटी द्वारा ली जाती है। लेकिन यहां जरूरत से ज्यादा काम का हवाला देकर एफ आई आर दर्ज नहीं की जाती है।

इसके बाद 22 फरवरी की सुबह 9:00 बजे उन्हें पुन: भजनपुरा थाने बुलाया जाता है। थाने में पहुंचकर पीड़िता देवांशी आई ओ मनोज भाटी को फोन करती है तो वह कहते हैं कि आरोपित को ही उठाने आया हूं। लगभग 2 घंटे तक देवांशी थाने में रहती है, तभी आरोपी समीर अहमद के परिवार और उस मोहल्ले कै 50 से अधिक लोग मुस्लिम थाने पर जमा हो जाते हैं। इसके बाद कई प्रभावशाली मुस्लिम अंदर जाकर एस एच ओ आर एस मीणा से मिलने जाते हैं।

इसके उपरांत उनके सुर बदल जाते हैं। वह सब आरोपी के बजाय देवांशी पर ही समझौते का दबाव और पीड़िता पर एफ आई आर दर्ज करने की बात करने लगते हैं। देवांशी की मां को केबिन से बाहर भेज कर उन्हें घंटों बैठाए रखा जाता है लेकिन एफ आई आर दर्ज नहीं होती है। अंततः एस एच ओ मीना और आई ओ मनोज भाटी और समाज के कई लोगों के दबाव पर वह थक हार कर समझौते के लिए राजी होती है, तो उल्टा उन्हीं पर एफ आई आर दर्ज करने की धमकी दी जाती है।

उसी वक्त थाने में मौजूद आरोपी समीर अहमद द्वारा जुल्म कबूल लेने के बाद भी सभी का रवैया देखते हुए देवांशी का मन बदल जाता है। वह जिद पर अड़ जाती है कि उन्होंने आरोपी का कॉलर पकड़ कर अपराध किया है तो उन पर भी f.i.r. की जाए लेकिन उसकी शिकायत को भी f.i.r. में दर्ज किया जाए। अगले दिन जब देवांशी लिखित शिकायत की कॉपी मांगने थाने जाती है तब आरोपित एवं अन्य मुस्लिम लोगों की उपस्थिति में आई ओ मनोज भाटी ने उस एफ आई आर को फाड़ कर कूड़ेदान में डाल दिया। यह सब देवांशी ने एक मीडिया से बात करते हुए फोन पर बताई है।

थाने में आई ओ और एसएचओ के बर्ताव को देखते हुए वह एसीपी से मिलने उनके केबिन गई तो उन्हें वहां से पुलिस के द्वारा हटा दिया गया। देवांशी के सारे प्रयास निरर्थक साबित हो रहे हैं। इसी उपक्रम में वह राष्ट्रीय महिला आयोग को कॉल करके अपनी समस्या बताएं तो उन्हें सीलमपुर स्थित डीसीपी ऑफिस जाने या एसीपी से शिकायत करने के लिए कहा गया। एसीपी के आदेश अनुसार संबंधित भजनपुरा थाने को एफ आई आर दर्ज करने को कहा जाता है।

जब वह एफ आई आर दर्ज कराने थाने पहुंचती है तो 1 दिन पहले की शिकायत के आधार पर शिकायत दर्ज करने को कहती है । वहां ऊपर से फोन आने के तरदीक करते हुए कहा जाता है कि एफ आई आर दर्ज हो जाएगा लेकिन उसकी कॉपी लेने 12:00 बजे रात के आसपास आना होगा।

सोचिए एक अकेली लड़की को रात 12:00 बजे उस संवेदनशील इलाके में थाना बुलाया जाता है। फिर भी जैसे तैसे अपने चचेरे भाई को साथ लेकर वह रात 12:00 बजे कॉपी लेने थाना पहुंचती है। जब थाने जाकर एफ आई आर की कॉपी रिसीव की जाती है तो उसमें बड़ा झोल यह रहता है कि f.i.r. में जो उनकी शिकायत थी वह न लिखकर उसे एक आम छेड़छाड़ और बदतमीजी जैसा मामला बना दिया जाता है। साथ ही आरोपी का नाम व पता देने के बाद भी f.i.r. से वह सूचनाएं गायब रहती है।

एफ आई आर मे शिकायत दर्ज कराने के सिलसिले में तीन-चार दिन थाने में जुझने के बाद वह निराशा और समीर के व्यंग भरे कुटिल मुस्कान से तंग आकर प्रथम दृष्टया पराजय और आंखों में आंसू लिए 24 फरवरी को इसी तरह अपने घर पहुंचती है। तब तक इलाके में अचानक से दंगे भड़क जाते हैं। उत्तर पूर्वी दिल्ली जलने लगती है और देवांशी को कई दिनों तक डर के साए में घर में कैद रहना पड़ता है। इन सबके बावजूद जब दंगा शांत होता है तो हालात बदल चुके होते हैं। उन गलियों में हिंदुओं को किसी तरह डर के साए में रहना पड़ रहा था। इसी बीच उन्हें न्याय के लिए कोर्ट जाने के लिए कहा जाता है।

वहां भी बयान दर्ज न हो पाता है। इसी इंतजार में एक डेढ़ महीने बीत जाते हैं। तब देवांशी सांसद मनोज तिवारी से आई ओ, एसएचओ और समीर पर शिकायत पत्र के जरिए कार्रवाई की मांग करती है। यह पत्र 1 मई को भेजा गया, लेकिन 3 महीनों के पश्चात् अभी तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। इधर समीर अहमद आए दिन नए-नए तंज कस रहा है और धमकियां दे रहा है। इन सब से देवांशी भी काफी परेशान है और वह उन लोगों पर कार्रवाई चाहती है। ताकि अपनी बहन या अन्य किसी लड़की के साथ आगे से ऐसा न हो। अब देखना है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है या किसी बड़ी घटना के घटने का इंतजार कर रहा है।

Facebook Comments Box