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निर्भया के दरिंदों को मौत देने के लिए HC का आज आएगा बड़ा फैसला,मोदी सरकार को मिलेगी सफलता ?

निर्भया बलात्कार और हत्या मामले में दिल्ली हाईकोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा जिसमें केंद्र सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है। जिसमें निर्भया कांड के दोषियों की फांसी पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है। निर्भया मामले में 4 दोषियों की फांसी की सजा पर अनिश्चितकालीन रोक को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

अब दिल्ली कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा कि दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाए या अलग-अलग ? दरअसल केंद्र सरकार ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था यह चारों दोषी न्यायिक तंत्र का गलत फायदा उठा कर फांसी को टालने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दे कि एक दोषी की याचिका पेंडिंग होने के कारण से 3 दोषियों की फांसी पर भी ब्रेक लग जाता है। सरकार का कहना है कि दोषियों को राहत नहीं दी जा सकती है। पहले 22 जनवरी को सुबह 7:00 बजे चारों दोषियों को फांसी दी जानी थी। लेकिन दोषियों ने कानूनी दांवपेच का प्रयोग कर फांसी रुकवा ली थी जिसके बाद दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने नया तारीख का ऐलान करते हुए दोषियों को एक फरवरी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था।

लेकिन एक बार फिर दोषियों ने कानूनी दांवपेच का खेल खेलते हुए फांसी को एक बार फिर से टाल दिया। इस मामले में तीन लोगों की क्यूरेटिव पिटिशन सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। जबकि मुकेश और विनय की दया याचिका भी राष्ट्रपति ने खारिज कर दी है। वही अक्षय की दया याचिका फिलहाल राष्ट्रपति के पास लंबित है। दूसरी तरफ नई नई याचिका लगाने और कोर्ट से उनके लंबित रहने के चलते ही 2 बार उन्हें फांसी दिए जाने के लिए आदेश जारी किया गया था।

लेकिन इन्ही कानूनी दांवपेच के कारण दोषियों की फांसी की अवधि बढ़ती जा रही है। बता दे कि दक्षिणी दिल्ली के मुद्रिका बस स्टॉप पर 16 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त के साथ एक प्राइवेट बस में थी. उस वक्त पहले से ही बस में ड्राइवर समेत छह लोग सवार थे.

किसी बात पर छात्रा के दोस्त का बस के स्टाफ से विवाद हुआ जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया जिसके बाद लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया।

पीड़िता का इलाज पहले सफदरगंज अस्पताल में चला सुधार ना होने पर पीड़िता को एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13 दिन यानी 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में निर्भया की मौत हो गयी।

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