अमर प्रेम की मिसाल! पति की मौत के बाद पत्नी ने भी त्यागे प्राण, मृत्यु भी नहीं कर पाई जुदा

ऐसा माना जाता है कि सात फेरे के बाद पति पत्नी का रिश्ता सात जन्मों के लिए हो जाता है। उनके रिश्ते की नींव प्यार पर ही टिकी होती है। वे सुख दुख दोनों में एक दूसरे का साथ निभाते हैं। जो पति पत्नी एक दूसरे कि परवाह करते हैं उनका रिश्ता ही सच्चा कहलाता है।वे सात जन्मों तक साथ जीने मरने कि कसम खाते हैं।

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ये साथ जीने और मरने कि कसमें यहां सच हो गई । मध्य प्रदेश के निमच जिले में कुछ ऐसा ही हुआ पति कि मृत्यु के कुछ ही देर बाद पत्नी ने भी अपने प्राण त्याग दिए

जावद तहसील के गोठा गांव में पति पत्नी की बेशुमार मोहब्बत और साथ जीने मरने का वादा पूरा करते हुए देखा गया। जिस आंगन में पति अपनी पत्नी को साथ लेकर आया था उसी आंगन में पति पत्नी दोनों की अर्थी एक ही वक़्त पर साथ साथ उठी। यह नजारा आमतौर पर देखने को नहीं मिलता है। जितने भी लोग उपस्थित थे उनकी आंखे भर आई।

जानकारी मिल रही है कि रविवार की रात अचानक ही शंकर धोबी कि मृत्यु हो गई । उनकी पत्नी बसंती बाई बोलने में असमर्थ है। ऐसे में जब शंकर धोबी की मृत्यु की बात उनके बेटे ने इशारे में अपनी मा को बताई तो बसंती यह सदमा बर्दास्त नहीं कर सकी और 2 घंटे के बाद ही उन्होंने भी अपना शरीर त्याग दिया।

जैसे ही उनके निधन की खबर फैली तो गांव के लोग जुट आए और पति पत्नी की दूल्हा दुल्हन बना कर शव यात्रा निकाली गई। दोनों का अंतिम संस्कार भी एक साथ ही किया गया।

बुजुर्ग दंपति के बेटे बद्रीलाल ने बताया कि उनके माता पिता एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। वो एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। हर जगह वो साथ ही जाते थे। किसी भी कार्यक्रम या बाज़ार कहीं भी जाना हो वो एक साथ ही जाते थे। ऐसे में उन्होंने अपना अंतिम सफर भी एक साथ ही तय किया। अब इनकी अमर प्यार कहानी कि चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।

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