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जिससे थी उम्मीदें, वो बेवफा निकला: ‘सरजी’ के गले का फाँस बना शाहीन बाग़,बिगड़ा चुनावी गणि

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अब यह बात किसी से भी नहीं छुपी है कि हाथों में सविधान लेकर चिल्लाने वाले लोग कैसे देश को गाली देते हैं। आपको बता दें कि जिस तरह शाहीन बाग का आंदोलन शुरू हुआ जिसका असली मुद्दा सीएए था,लेकिन जिन भी नेताओं ने इसको प्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया था उनके लिए अब यह गले की फांसी बनती दिख रही है।

असल में देखा जाए तो योजना यह थी कि यहां तिरंगा लहरा कर और संविधान का पाठ पढ़ कर पूरी तरह से देशभक्ति का दिखावा किया जाए वही हकीकत में जो हुआ वह सबसे अलग था.

इस कथित के मुख्य साजिशकर्ता सरजी इमाम ने ही कह दिया कि संविधान से मुस्लिमों को किसी तरह की कोई उम्मीद नहीं है और इनको बस इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उसने न्यायपालिका को मुसलमानों का दुश्मन और अंग्रेजों को दोस्त बता दिया।

वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की हालत सांप- छछूंदर से भी बदतर है। अरविंद केजरीवाल सरजील को गिरफ्तार करने की बात करते हैं, लेकिन कन्हैया कुमार मामले में कार्यवाही में देरी करते हैं। केजरीवाल इतने बुरे फंसे हैं कि 1 दिन पहले जिनके डिप्टी ने सरजील के आंदोलन का समर्थन किया था.

वह उसी सरजील को गिरफ्तार करने की बात कर रहे हैं, क्योंकि अरविंद केजरीवाल को अब यह पता चल चुका है कि शाहीन बाग से जो उम्मीदें थी उसने नकारात्मकता का रूप लेकर उनके खिलाफ ही माहौल बनाना शुरू कर दिया है।

जानकारी दे दे कि सरजील राजनीतिक फसल काटने पहुंचे थे लेकिन उन्हें भी इसका अंदाजा नहीं था कि उनके पार्टी के ही अमानतुल्लाह से भी ज्यादा कट्टरवादी इस आंदोलन को हाईजैक कर लेगा।

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