Dev Diwali : काशी में उतरा देवलोक देव दीपावली पर जगमग हुए घाट, पहले कभी नहीं दिखा ऐसा नजारा

उत्तर प्रदेश की काशी साल का आखिरी त्योहार देव दिवाली पूरे जोश के साथ मना रही है। देव दिवाली के अवसर पर काशी के गंगा घाट को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और सभी 88 घाट मालाओं और दीपों से जगमगा उठते थे . विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए थे जश्न का माहौल है और हर तरफ खुशी और खुशी ही थी

Dev Diwali
पहले कभी नहीं दिखा ऐसा नजारा

देव दिवाली पूरे देश में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के विस्तार के बाद पहली बार यहां देव दिवाली की अद्भुत छटा देखने को मिली। सोमवार शाम काशी के 88 घाटों पर 10 लाख दीपक जलाए गए। उसी समय जहाज का किनारा दीपक से जगमगा उठा। इसके अलावा राजस्थान के विश्वविख्यात पुष्कर के 52 घाटों पर रोशनी की गई।

काशी में उतरा देवलोक देव दीपावली पर जगमग हुए घाट

इस बार की खास बात यह है कि देव दिवाली पर पूरा विश्वनाथ धाम दो लाख के फूलों से नहीं बल्कि 80 लाख के फूलों से जगमगाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि विश्वनाथ धाम के इस 80 लाख रुपये के फूलों की सजावट विशाखापत्तनम के बाबा विश्वनाथ के भक्त के. बाबूराव ने की है. इसमें देसी के साथ विदेशी फूलों की सुगंध भी शामिल है।

कथा महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। इसी खुशी में देवी-देवता काशी के गंगा घाट पर उतरे और कई दीप जलाए। इसलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है। इस परंपरा के तहत, दुनिया भर से श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दीप चढ़ाते हैं और देवताओं से आशीर्वाद लेते हैं।

दीपदान कार्तिक मास की अंतिम तिथि को करना चाहिए। अग्नि पुराण में कहा गया है कि दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न होगा। विद्वानों का कहना है कि पद्म पुराण में भगवान शिव ने अपने पुत्र कार्तिकेय को भी दीपदान का महत्व बताया है।