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DDC चुनाव में बड़ी संख्या में लोगों ने लिया भाग, क्या स्थानीय निकाय चुनाव से दिखेगा बदलाव?

वोटों की गिनती का काम 22 दिसंबर को किया जाएगा

(मुफ्ती इस्लाह)

श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद (DDC) के चुनाव शनिवार को खत्म हो जाएंगे. अब हर किसी को इंतज़ार है चुनाव के नतीजों का. वोटों की गिनती का काम 22 दिसंबर को किया जाएगा. पिछले साल अगस्त में आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद से ये कोई पहला चुनाव हुआ है. इस चुनाव में बीजेपी की टक्कर गुपकार गठबंधन से है. नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला का आवास श्रीनगर में 01, गुपकार रोड पर है. यहीं पर 4 अगस्त 2019 को 08 दलों ने एक साथ बैठक की थी.इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के इन 08 दलों ने साथ मिलकर केंद्र सरकार की राज्य की नीतियों के खिलाफ नया गठबंधन बनाने की घोषणा की थी.

बीजेपी ने साफ-साफ कह दिया है कि अब आर्टिकल 370 पर कोई बात नहीं होगी. बीजेपी नया कश्मीर का नारा लगा रही है. जहां एक बड़ा बुनियादी ढांचा और बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, सड़क, नदी और रेल नेटवर्क की बात की जा रही है. साथ ही बीजेपी ने उग्रवाद और भ्रष्टाचार खत्म करने का वादा किया है. बीजेपी ने इस चुनाव में सिर्फ विकास का मुद्दा उठाया है.

चुनावी दांव-पेंचप्रतिद्वंद्वियों के अलावा, पर्यवेक्षकों का कहना है कि केंद्र को जम्मू में भाजपा के गढ़ में नहीं तो कश्मीर में लोगों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में स्वस्थ भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए गुपकर गठबंधन को धन्यवाद देना चाहिए. गठबंधन ने एक बड़ा जोखिम उठाया और जब चुनाव लड़ने का फैसला किया तो उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा. इनके नेता इस बात को लेकर पसोपेश में थे कि चुनाव में शामिल हों या न. चुनाव से जुड़ने का मतलब होगा स्थानीय लोगों की भावनाओं को धोखा देना. जो राज्य के विभाजन से आहत और अपमानित महसूस करते थे. उन्हें लगा कि अगर चुनाव में भाग न लिया जाय तो फिर यहां बीजेपी को बड़े आराम से जीत मिल जाएगी. इसलिए गुपकार गठबंधन ने चुनाव में भाग लेने का विकल्प चुना. हालांकि बड़े नेताओं ने प्रचार नहीं किया. इससे लोगों को ये बताने की कोशिश की गई कि उन पर चुनाव थोपा गया है.

बिना डर के चुनाव
गांदरबल जिले के संवेदनशील वकुरा इलाके के एक मतदान केंद्र पर एक युवा मतदाता ने हमें बताया कि वो और उसके दोस्त बिना किसी डर, शर्म या भ्रम के वोट डाल रहे हैं क्योंकि उनका एजेंडा साफ है. उन सभी को वोट नहीं देना जो जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा ‘इस बूथ पर आमतौर पर मतदान से ज्यादा पत्थरबाजी देखने को मिलेगी. केवल कट्टर कार्यकर्ता ही यहां मतदान करने का साहस करेंगे. यहां मतदान आज तक इतना स्वतंत्र और खुला नहीं हुआ था.’

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बदलाव की मांग
बारामूला में सिंघोरा में निवासियों ने कहा कि उनके पास मतदान करने का एक अलग कारण है. उन्होंने कहा ‘हम भाजपा और गुपकार के बारे में हीं जानते हैं. हमलोग इसलिए वोट देने के लिए आए हैं क्योंकि हम अपने गांव के उम्मीदवार का समर्थन करते हैं. पिछले 50 वर्षों से हमारे पास पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है.’ कश्मीरी स्तंभकार मोहम्मद सईद मलिक का मानना ​​है कि नतीजों के बाद भाजपा और गुपकार गठबंधन दोनों एक-दूसरे पर हमले तेज करेंगे.


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