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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खुशखबरी : कच्चे तेलों के दाम में आयी भारी गिरावट,पानी से भी हुआ सस्ता !

भारतीय अर्थव्यवस्था(Indian Economy ) के लिए बड़ी ही राहत पहुंचने वाली खबर आ रही है , कोरोना संक्रमण (Coronavirus Crisis) के चलते गहरी हुई चिंताओं की लकीरों के छटने के दिन आ गए है। कच्चे तेलों की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिसके बाद दुनियाभर में आर्थिक रिकवरी को लेकर घटती उम्मीदों को सहारा मिल गया है । कच्चे तेल का उत्पादन और एक्सपोर्ट करने वाले देशों की ओर से लगातार क्रूड की सप्लाई बढ़ाई जा रही है।

इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 4 फीसदी गिरकर 39.19 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है ।इस भारी गिरावट के बाद कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है। भारत अपनी जरूरत के 83 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इसके लिए इसे हर साल 100 अरब डॉलर देने पड़ते हैं। कमजोर रुपया भारत का आयात बिल और बढ़ा देता है और सरकार इसकी भरपाई के लिए टैक्स दरें ऊंची रखती है।

अभी कच्चे तेल के दाम 39 डॉलर प्रति बैरल है। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं साथ ही इस वक़्त एक डॉलर की कीमत 74 रुपये है। इस तरह से एक बैरल की कीमत 2886 रुपये बैठती है। पर, अब एक लीटर में बदलें तो इसकी कीमत 18.15 रुपये के करीब आती है, जबकि देश में बोतलबंद पानी की कीमत 20 रुपये के करीब है।

अचनाक से कच्चे तेल की कीमतें में भरी गिरावट इसलिए भी आ रही है क्यूंकि – कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए दुनिया के ज्‍यादातर देशों में लॉकडाउन (Lockdown) लगा दिया गया था। इससे करोड़ों-अरबों लोग अपने घरों में बंद दरवाजों के पीछे कैद होने को मजबूर हो गए। इसके कारण , कारोबारी गतिविधियां (Business Activities) भी ठप हो गईं। नतीजा ये हुआ कि पेट्रोल-डीजल की मांग और खपत (Demand & Consumption) तेजी से धड़ाम हो गई।

भारत सरकार ने इस दौरान कम कीमत पर कच्‍चा तेल खरीदा जरूर, लेकिन उसके अनुपात में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत (Petrol-Diesel Price) में खास बदलाव नहीं किया। इससे सरकार को दो बड़े फायदे हुए। पहला देश के चालू खाता घाटा (CAD) में कमी आई और दूसरा सरकार के राजस्‍व (Revenue) में इजाफा हुआ। साथ ही , अर्थव्‍यवस्‍था के लिहाज से हाल में एक और अच्‍छी घटना हुई कि डॉलर (Dollar) के मुकाबले रुपये (Rupee) की स्थिति में सुधार आया गया । रुपया धीरे-धीरे डॉलर के मुकाबले 77 से सुधरकर 74 पर आ गया है ।

यानि कि अब डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में 4 रुपये की मजबूती आई गयी है। इससे सरकार को आयात के लिए भुगतान (Import Cost) कम करना पड़ा और देश के चालू खाता घाटा में कमी आई। रुपये के मजबूत होने से कच्‍चा तेल, इलेक्‍ट्रॉनिक, जेम्‍स एंड ज्‍वेलरी, फर्टिलाइजर्स, केमिकल्‍स सेक्‍टर को सीधा फायदा होता है।

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