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मुश्‍किल में फंसी भाजपा : भाजपाई सीएम को मिली कुर्सी छोड़ने की सलाह

कर्नाटक में भाजपा ने कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को गिराकर सत्ता में अपनी जगह पक्की की थी | इसे दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले कांग्रेस व जनता दल-एस के अयोग्य ठहराए गए 17 विधायकों ने उन्हें मझधार में छोडऩे का आरोप लगाते हुए भाजपा के प्रति नाराजगी जताई है।चिकबल्लापुर के अयोग्य विधायक डॉ. के. सुधाकर के निवास पर शुक्रवार को इन अयोग्य सदस्यों ने बैठक की।

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जिसमें बीसी पाटिल, एमटीबी नागराज, प्रतापगौड़ा पाटिल तथा एसटी सोमशेखर ने भाग लिया। बैठक में भावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई में हो रहे विलंब पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। यदि शीर्ष न्यायालय से उनको राहत नहीं मिलती है तो वे अगले तीन माह में होने वाले विधानसभा की रिक्त सीटों के उपचुनाव नहीं लड़ सकेंगे और ना ही सरकार में शामिल हो सकते हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मिलने तक का अवसर नहीं

बैठक में नेताओं ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं व मुख्यमंत्री येडियूरप्पा के उपेक्षापूर्ण रवैये पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की।उन्होंने अपनी समस्याओं के संदर्भ में मुख्यमंत्री येडियूरप्पा को एक सप्ताह की मोहलत दी है और ऐसा नहीं होने पर सत्ता से छोड़ देने की नसीहत दी है।

उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले किए वादों को भाजपा नेताओं ने भुला दिया है और हमें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मिलने तक का अवसर नहीं दे रहे हैं और कहते हैं कि अपनी समस्याएं खुद सुलझाएं।

बैठक करने की वजह

दिल्ली के भाजपा के वरिष्ठ नेता हमारे बारे में चिंतित नहीं हैं, शायद इसी वजह से हमारे केस की त्वरित सुनवाई नहीं हो रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि अगले दो माह में भी सुनवाई की बारी नहीं आएगी।सत्ता में आने से पहले हमें कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने को कहा गया था, लेकिन अब भाजपा नेताओं मुंह फेर लिया है।

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इनमें से कुछ नेताओं ने गुरुवार को उप मुख्यमंत्री अश्वथनारायण से भेंट करके अपनी समस्याएं उनके सामने रखी थीं, लेकिन उनसे कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने से बैठक करके सीधे येडियूरप्पा तक संदेश भेजने की कोशिश की गई है।

समर्थकों अपने समर्थन को वापस लेने का मन बनाया

इन नेताओं का कहा है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में किसी तरह के विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। अधिकारियों के तबादलों से लेकर हर मामले में हमारी उपेक्षा की जा रही है। हमारे साथ घोर वादाखिलाफी की है।उनका यह भी कहना था कि भाजपा के प्रदेश स्तर के नेताओं पर यकीन करके हमने दिए, मगर अब आलाकमान येडियूरप्पा के हाथ बांधे हुए है।

हमें अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं, समर्थकों को अपने साथ बनाए रखने में मुश्किल हो रही है। स्थानीय नेताओं से बात करने पर वे हर चीज के लिए दिल्ली की तरफ इशारा करते हैं।
आम जनता के बीच हमारी छवि खराब हो रही है। बैठक में इन नेताओं ने अपने राजनीतिक भविष्य को फिर से संवारने के बारे में भी विस्तार से चर्चा की।

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