NCB का एक और गवाह बोला, मुझसे भी कराया गया था ब्लैंक पेपर पर साइन,बाद में किया गया दुरुपयोग

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ड्रग्स केस में जांच जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है वैसे वैसे कई सारी नई नई बात खुलकर सामने आने लगी है.एनसीबी के द्वारा खाली पन्नों पर दस्तखत कराने के एनसीबी गवाह प्रभाकर सैल के दावे के कुछ दिन बाद मादक पदार्थ के एक अन्य मामले के दूसरे गवाह ने भी मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक समेत एजेंसी के विभिन्न अधिकारियों पर ऐसा ही आरोप लगाया है.नवी मुंबई के शेखर कांबले ने कहा कि इस साल अगस्त में वानखेड़े एवं अन्य ने उससे 10-12 खाली पन्नों पर दस्तखत कराये और बाद में उनका उपयोग मुंबई के खारघर से एक नाईजीरियाई नागरिक की गिरफ्तारी के सिलसिले में पंचनामे के तौर पर किया गया.

उसने यह भी दावा किया कि इस नाईजीरियाई नागरिक के पास कोई मादक पदार्थ नहीं मिला लेकिन एनसीबी ने गलत तरीके से दिखाया कि उसके पास एमडी ड्रग पाया गया. उसने कहा, ‘‘ अगस्त में छापे के दिन मैं और छह एनसीबी अधिकारी नाईजीरियाई नगारिक को पकड़ने पहुंचे लेकिन वह वहां से भाग निकला. बाद में हम खारगर में दूसरे स्थान पर गये जहां 50 नाईजीरियाई मौजूद थे. जैसे ही हम अंदर घुसे , सारे भाग गये लेकिन अधिकारियों ने किसी तरह उनमें दो को पकड़ लिया एवं उन्हें एनसीबी कार्यालय लाया . उनमें से एक को छोड़ दिया गया. ’’

Drugs case

कांबले ने कहा, ‘‘ मेरे और दोस्त के आधारकार्ड लेने के बाद एनसीबी अधिकारियों ने 10-12 पन्नों पर मुझसे हस्ताक्षर करने को कहा. जब मैंने पंचनामे के बारे में पूछा तब वानखेड़े एवं अन्य अधिकारियों ने कहा कि वे लिख देंगे और मुझे चिंता करने की जरूरत नहीं है. ’’ उसने कहा कि उसे तब पता चला कि वह इस मामले में गवाह है जब महाराष्ट्र के मंत्री एवं राकांपा नेता नवाब मलिक ने एजेंसी के 26 ड्रग मामलों एवं उन मामलों के गवाहों के नामों को सार्वजनिक किया.

उसने कहा कि उसने मलिक के दावे के बारे में पढ़ने के बाद नाईजीरियाई मामले में दावे को लेकर अपनी चिंता प्रकट करने के लिए मंगलवार को एनसीबी अधिकारी अनिल माने को फोन किया. कांबले ने कहा, ‘‘ अधिकारी ने मुझे बुधवार को एनसीबी कार्यालय आने को कहा लेकिन मैं नहीं गया. ’’कांबले ने कहा कि उसकी जिंदगी के साथ कुछ भी हो सकता है क्योंकि उसने एनसीबी की धोखाधड़ी के बारे में अपना मुंह खोला है.

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