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हवा की माफिक 180 KM प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ी ट्रेन, दंग रह गये लोग

यह ट्रेन नागदा से दोपहर 1 बजे रवाना हुई और 2 घंटे बाद 3 बजे कोटा पहुंची. अगर रास्ते में ट्रेन से गाय नहीं टकराती तो यह करीब डेढ़ घंटे में ही नागदा से कोटा पहुंच जाती. (सांकेतिक तस्वीर)

कोटा. कोटा रेल मंडल (Kota Railway Division) ने ट्रेन स्पीड का नया इतिहास (New history) रचा है. कोटा मंडल में गुरुवार को जब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड (Speed) से दो कोच की ट्रेन पटरियों पर हवा के माफिक दौड़ी तो लोग दंग रह गये. हालांकि 180 की स्पीड से दौड़ती इस ट्रेन से रास्ते में एक गाय टकरा गई, लेकिन गनीमत रही की इस घटना के बाद कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई. अन्यथा तेज रफ्तार से दौड़ती हुई ट्रेन गाय से टकराकर बेपटरी भी हो सकती थी. इस घटना से ट्रेन के परीक्षण झटका लगा है. हालांकि इस घटना को छोड़कर 180 की रफ्तार से ट्रेन का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा.

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के लिए ट्रेन को पहले बिना ट्रॉयल के नागदा तक ले जाया गया. यहां से ट्रेन को परीक्षण के लिए रवाना किया गया. रामगंजमंडी और मोड़क के बीच 180 की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन से अचानक एक गाय टकरा गई. इसके चलते ट्रेन करीब 25 मिनट मौके पर ही खड़ी रही. गाय की टक्कर से केटल गार्ड और इंजन के मामूली क्षतिग्रत होने की जानकारी भी सामने आई है. इस घटना के बाद ट्रेन को फिर से 180 की रफ्तार से दौड़ाया गया. कोटा पहुंचकर ट्रेन का परीक्षण पूरा हो गया. इस ट्रेन का परीक्षण लबान स्टेशन तक करना था. लेकिन फिर आगे नहीं किया गया.

दो घंटे में कोटा पहुंची परीक्षण ट्रेन
यह ट्रेन नागदा से दोपहर 1 बजे रवाना हुई और 2 घंटे बाद 3 बजे कोटा पहुंची. अगर रास्ते में ट्रेन से गाय नहीं टकराती तो यह करीब डेढ़ घंटे में ही नागदा से कोटा पहुंच जाती. राजधानी ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से नागदा से कोटा तक करीब सवा दो घंटे में पहुंचती है. वहीं 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अन्य सुपरफास्ट ट्रेनें करीब ढाई घंटे में नागदा से कोटा पहुंचती हैं.आज नहीं होगा ट्रेन का परीक्षण

शुक्रवार को ट्रेन का परीक्षण नहीं होगा. रेलवे यार्ड में ही ट्रेन का रखरखाव किया जाएगा. इसके बाद कोचों में वजन रखा जाएगा. शनिवार को वजन के साथ फिर से ट्रेन का परीक्षण शुरु हो सकता है. उल्लेखनीय है कि यह परीक्षण लखनऊ स्थित अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा किया जा रहा है. परीक्षण के लिए आरडीएसओ अपने साथ दो कोचों की स्पेशल ट्रेन लाई है.

दिल्ली-मुंबई का 1400 किलोमीटर का सफर 9 घंटे 15 मिनट में पूरा हो जाएगा
इससे पहले मंगलवार को ट्रेन का परीक्षण 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से किया गया था. यह परीक्षण 6 जनवरी तक चलेगा. ट्रेन का परीक्षण निकट भविष्य में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने की तैयारी के मद्देनजर किया जा रहा है. 160 की स्पीड पर ट्रेन चलने पर दिल्ली-मुंबई का 1400 किलोमीटर का सफर 9 घंटे 15 मिनट में पूरा हो जाएगा.

2018 में वंदेमातरम (ट्रेन-18) को भी 180 की रफ्तार से दौड़ाया गया था

वहीं इससे पहले 2018 में वंदेमातरम (ट्रेन-18) को भी कोटा मंडल में 180 की रफ्तार से दौड़ाया जा चुका है. इस ट्रेन में अलग से इंजन नहीं था. कोचों के एक हिस्से में ही इंजन लगा हुआ था. इस ट्रेन को अधिकतम 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने के लिए तैयार किया गया था. लेकिन अलग से इंजन लगाकर ट्रेन को 180 पर दौड़ाने का यह पहला मामला है. इस ट्रेन में इंजन के अलावा अलग से विशेष डिजाइन के दो कोच लगे हुए हैं.


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