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सूफी संत रूमी के ये प्रेरणादायक विचार जीवन में भर देंगे पॉजिटिविटी

तेरहवीं शताब्दी में सूफी संत जलालुद्दीन मोहम्मद बल्खी ‘रूमी’ का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था. अफगानिस्तान के बल्ख शहर में जन्म होने के कारण इनके नाम के पीछे बल्खी लगा. यह हिस्सा उस समय पर्सियन साम्राज्य के अंतर्गत आता था. संत रूमी ने 30 साल की आयु में कई भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया और आगे चलकर उन्हें कई धार्मिक ग्रन्थों का ज्ञान भी प्राप्त हो गया. जीवन से जुड़े कई उपदेश उन्होंने मानव कल्याण के लिए दिए, उनमें से कुछ बातें यहां बताई गई है.

जो खोया, वह वापस आएगा
संत रूमी ने मनुष्य जीवन में इंसान द्वारा खोई जाने वाली किसी भी चीज के लिए दुखी नहीं होने का आग्रह किया है. उनका कहना था कि किसी भी चीज के खोने पर दुःख व्यक्त नहीं करना चाहिए. वह चीज किसी न किसी रूप में फिर से तुम्हारे पास लौटकर आएगी.

प्यार की सुन्दरता दिखनी चाहिएसंत रूमी कहते थे कि अगर आप किसी से प्यार करते हो, तो उस प्यार की खूबसूरती दिखाई भी देनी चाहिए. उनके अनुसार ‘प्यार की सुन्दरता आपके काम में दिखनी चाहिए.’

खूबसूरती हर तरफ है
खूबसूरती को लेकर संत रूमी के विचार अलग थे. उनका मानना था कि खूबसूरती देखने के लिए आपको बगीचे में जाने की जरूरत नहीं है. जीवन की हर चीज खूबसूरत है और चारों तरफ खूबसूरती फैली हुई है.

हर इंसान खास काम के लिए बना है
संत रूमी के अनुसार हर इंसान का जन्म किसी न किसी ख़ास काम के लिए ही हुआ है. उनका कहना था कि इंसान के अन्दर काम करने की इच्छा भी भर दी गई है. अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग मकसद से आता है.

त्याग करें
संत रूमी के अनुसार आपको जो कुछ भी मिला है उसका त्याग करना चाहिए. उन्होंने कहा था कि जो कुछ भी आपको मिला, उसे मौत से पहले त्याग दें. इसके अलावा जो चीज बांटने वाली है, उसको बांट दें.

खुद की रौशनी से चमको
संत रूमी कहते थे कि दीवार पर सूर्य की किरणें आने से चमक दिखाई देती है लेकिन यह चमक उसकी खुद की नहीं है. उसी तरह दुनिया में हर चीज की अपनी कोई खूबी नहीं होती है, उस स्रोत की तलाश करो जो खुद की रौशनी से हमेशा चमकता है.

दोस्ती की अहमियत
संत रूमी के अनुसार एक दोस्त उन सभी रास्तों को जानता है, जिन पर चलकर आप उस तक पहुँच सकते हो. उन्होंने दोस्ती बरकरार रखने का उपदेश दिया और जीवन में इसे अहम बताया. उनका कहना था कि जिसके पास सच्चा दोस्त है, उसे आईने की जरूरत नहीं होती.

दुःख भी बन सकता है साथी
संत रूमी के अनुसार दुःख में सहानुभूति नहीं लेनी चाहिए. उनका कहना था कि खुले दिल से इसे स्वीकार करोगे, तो दुःख भी एक दिन आपका साथी बन जाएगा. उन्होंने दुःख को संवेदनाओं से भरा बाग़ बताया.

कल का इंतजार नहीं करें
जीवन का आनन्द आज को मानते हुए संत रूमी कहते थे कि दुनिया हमें कल का इन्तजार करने के लिए कहती है और यह मूर्खता है. जीवन का आनन्द उसी पल में हैं, जिसमें आप जी रहे हो. उन्होंने कल का इंतजार नहीं करने की बात कही.

ईश्वर प्रेम सब कुछ है
संत रूमी कहते थे कि ईश्वर से प्रेम करने से जीवन में चीजें बदल जाती है. उन्होंने ईश्वर प्रेम को जीवन का मूल मन्त्र बनाने की बात कही और कहा कि ईश्वर का प्रेम ताम्बे को भी सोना बना देता है.


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