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म्यांमार में भारत समर्थित प्रोजेक्ट के खिलाफ उग्रवादियों को शह दे रहा चीन!

कलादान नदी की तस्वीर. (विकीपीडिया)

नई दिल्ली. बीते कई महीने से चल रहे सीमा विवाद (Border Dispute) के बीच चीन भारत के खिलाफ उग्रवादी संगठनों (Insurgent Groups) को शह दे रहा है. कुछ दिनों पूर्व खबर आई थी कि भारत के उत्तर-पूर्वी इलाकों में चीन उग्रवादियों को शह दे रहा है. अब म्यांमार में भारत समर्थित कलादान मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के आस-पास उग्रवादियों के हमले के पीछे भी चीन का नाम आ रहा है.

म्यांमार में प्रोजेक्ट्स पर हमले करने वाले उग्रवादी संगठन का नाम अराकान आर्मी (Arakan Army) है. बीते एक साल के दौरान म्यांमार के सैनिकों और इस अराकान आर्मी के बीच भिड़ंत की 600 से ज्यादा घटनाएं हुई हैं. इनमें ज्यादातर घटनाएं करीब साढ़े तीन हजार करोड़ की लागत वाले कलादान प्रोजेक्ट के आस-पास के इलाकों में हुई हैं.

कई बार हो चुके हैं हमले
बीते समय में कम से कम चार बार इस उग्रवादी संगठन ने कलादान प्रोजेक्ट के लिए पहुंचाए जा रहे सामान पर हमला किया. कई बार म्यांमार सैनिकों पर ये संगठन हमला कर चुका है. हिंदुस्तान टाइम्स पर प्रकाशित एक रिपोर्ट कहती है कि 2019 में जब राखिने और चिन राज्यों में कलादान प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण काम पूरा होने वाला था तब अराकान आर्मी ने इन राज्यों में अपना गढ़ बना लिया. अराकान आर्मी लगातार कलादान प्रोजेक्ट के काम में बाधा डालती रहती है.चीनी हथियारों का जखीरा बरामद

बीते 23 जून को थाईलैंड मिलिट्री ने एक चीनी हथियारों का एक जखीरा पकड़ा था जिसमें एके 47 बंदूकें, मशीन गन, ग्रेनेड और अन्य हथियारा भारी मात्रा में थे. थाई मिलिट्री ने हथियारों का जखीरा माये सॉत जिले में पकड़ा था जिसकी सीमा म्यांमार से लगती है. जानकारी लगी कि ये हथियार करीब 7 करोड़ रुपए के थे. इन्हें अराकान आर्मी और अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी को पहुंचाया जाना था. इसके अलावा भी इन इलाकों में चीनी हथियारों की सप्लाई की खबरें आ चुकी हैं.

म्यांमार की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बनता संगठन
म्यांमार में लगातार चीनी हथियारों की सप्लाई की वजह से अराकान आर्मी मजबूत हो रही और सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बनती जा रही है. 2019 के नवंबर महीने में अराकान आर्मी ने पांच भारतीयों, एक म्यांमार सांसद समेत कुछ अन्य लोगों को बंधक बना लिया था. बंधक बनाए गए भारतीय म्यामां में कलादान सड़क परियोजना में काम कर रहे थे. अराकान आर्मी की हिरासत में दिल का दौरा पड़ने से एक भारतीय की मौत हो गई. तब भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद इन लोगों को छुड़ाया जा सका था.

बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है कलादान

कलादान प्रोजेक्ट भारत और म्यांमार के बीच आर्थिक सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इस प्रोजेक्ट के तहत सित्तवे पोर्ट से कालेतवा तक कलादान नदी के किराने करीब 225 किलोमीटर लंबा जलमार्ग और 62 किलोमीटर लंबा सड़क मार्ग शामिल है.


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