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महाराष्ट्र चिट्ठी मामला: राजनीतिक लैब में राज्‍यपाल कोश्यारी का पॉप टेस्ट | mumbai – News in Hindi

भगत सिंह कोश्‍यारी के पत्र के बाद मचा बवाल.

मुंबई. महाराष्ट्र में राज्यपाल (Governor) भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) की चिट्ठी ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है. राज्यपाल ने चिट्ठी में तंज भरे शब्दों से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) से राज्य में मंदिर नहीं खोलने पर स्पष्टीकरण मांगा था. अब इस पर अगाड़ी नेता बिगड़ गए हैं और उन्होंने राज्यपाल पर खुलकर निशाना साधना शुरू कर दिया है. उन्होंने राज्यपाल पर मुख्यमंत्री के लिए ‘अंतरंग भाषा’ का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है और शिवसेना ने राज्यपाल को बीजेपी का एजेंट बताकर फ्रंटफुट पर आकर जमकर घेरा है.

‘राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली’
राज्यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी की चिट्ठी ने राज्य की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता की पिच तैयार करने का काम किया है. दरअसल, राज्यपाल ने चिट्ठी में शिवसेना पर तंज कसते हुए कहा कि राज्य में बार और रेस्टोरेंट खुल गए लेकिन मंदिर कब तक खुलेंगे. इस पर ठाकरे सरकार ने राज्यपाल की धोती ही पकड़ ली और राजभवन को हिलाकर रख दिया. शिवसेना ने कहा है कि राज्य के मंदिरों को खोलने के लिए बीजेपी ने आंदोलन शुरू किया है. उस राजनीतिक आंदोलन में राज्यपाल को सहभागी होने की आवश्यकता महसूस नहीं होती. लगता है राज्यपाल के सहारे महाराष्ट्र सरकार पर हमला करना बीजेपी को भी कहीं न कहीं भारी पड़ गया है.

शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ अप्राकृतिक गठजोड़राज्य में पिछले दो वर्षों में गठबंधन राजनीति में नए-नए प्रयोग देखने को मिले हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व के चलते एनडीए के सहयोगियों को भी पार्टी से परे कर दिया गया है. राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव के परिणामों से शिवसेना और बीजेपी के बीच का द्वंद्व आखिरकार टूट गया.

वहीं, चुनाव पूर्व एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने पैर पीछे खींच लिए थे. इधर, बीजेपी कोशियारी के साथ रहने का प्रयास करती रही, लेकिन शिवसेना के एनसीपी और कांग्रेस के साथ अप्राकृतिक गठजोड़ ने बीजेपी सरकार को चारों कोने चित कर दिया.

खुद को ठगा महसूस कर रही बीजेपी
इसके बाद महाराष्ट्र में नए राजनीतिक प्रयोग के बड़े राजनीतिक प्रभाव देखने को मिले. इसने देश में बीजेपी विरोधी राजनीति को स्पष्ट रूप से नकार दिया, जहां एनडीए के पूर्व सहयोगी बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस और अन्य लोगों से हाथ मिलाने के लिए लक्ष्मण-रेखा को पार करने को तैयार हो गए. वहीं, शिवसेना और कांग्रेस में गठजोड़ की किसी ने उम्मीद तक नहीं की थी. शरद पवार की एनसीपी और शिवसेना की गठबंधन वाली सरकार में कांग्रेस भले ही छोटी भूमिका में हो लेकिन वह इसमें सहज दिख रही है. कुल मिलाकर महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार ने भारतीय राजनीति में खुद के लिए नई जगह स्थापित की है. वहीं, बीजेपी अपनी इस हार में खुद को ठगा महसूस कर रही है.

बीजेपी के लिए बिहार में राह आसान नहीं
बता दें कि भारत की आर्थिक राजधानी ने राज्य विधानसभा चुनावों के बाद से कई राजनीतिक तुफानों का सामना किया है. इसमें संपार्श्विक क्षति को व्यापक रूप से फैलाया गया है, जिसमें बॉलीवुड भी शामिल है. महाराष्ट्र के अनुभव ने अन्य राज्यों में मतदान के बाद बीजेपी को सावधान कर दिया है. निष्कर्षत: बीजेपी के लिए बिहार विधानसभा चुनाव में राह आसान नहीं होगी.


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