Advertisement
Categories: देश

भारतीय मूल की लेखिका अवनि दोशी की किताब ‘बर्न्ट शुगर’ बुकर पुरस्कार के काफी करीब

अवनि दोशी ने बताया कि इसके लिए वास्तिक प्रेरणा कहां से मिली यह बता पाना मुश्किल है.

लंदन. दुबई में रह रही भारतीय मूल की लेखिका अवनि दोशी की किताब ‘बर्न्ट शुगर’ को बुकर पुरस्कार मिलेगा या नहीं इसपर फैसला गुरुवार की शाम होना है. दोशी के साथ कुल छह लेखकों की पुस्तकें इस वर्ष के बुकर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट की गई हैं. खास बात है कि इस किताब को पूरा करने में अवनि को कई सालों का वक्त लगा है. फिक्शन के लिए बुकर प्राइज (Booker Prize) पहली बार साल 1969 में दिया गया था.

अमेरिका में जन्मी और वर्तमान में दुबई में रह रहीं अवनि की पुस्तक के साथ बुकर पुरस्कार की दौड़ में जिम्बावे के लेखक सिटसी दांगारेंबगा की ‘दिस मॉरनेबल बॉडी’, अमेरिकी लेखक डायना कुक की ‘द न्यू वाइल्डनेस’, माजा मैन्जिस्टे की ‘द शैडो किंग’, ब्रांडन टेलर की ‘रियल लाइफ’और न्यूयॉर्क में रह रहे स्कॉटलैंड के लेखक डगलस स्टुअर्ट की ‘शगी बेन’ शामिल हैं.

दोशी ने कहा, ‘मैंने कई साल में और कई हिस्सों में ‘बर्न्ट शुगर’ लिखी. इसके लिए वास्तिक प्रेरणा कहां से मिली यह बता पाना मुश्किल है लेकिन मुझे पुणे में अपनी दादी का फ्लैट याद आता है, और उनके बेडरूम में लगे शीशे में कुछ खराबी है और उसमें मेरा अक्स नजर आता है. एक पल के लिए मुझे अपने चेहरे में दो अलग लोगों की शक्लें दिखाई देती हैं. उस दिन मैंने कुछ लिखा जो मेरी किताब का पहला हिस्सा बना.’

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इस बार बुकर पुरस्कार काफी अलग होने वाला है. आयोजकों का कहना है कि लंदन के राउंड हाउस से इसका प्रसारण किया जाएगा. सभी 6 शॉर्टलिस्टेड लेखक कार्यक्रम में राउंडहाउस से एक खास स्क्रीन के जरिए जुड़ेंगे. यह कार्यक्रम वर्चुअल के अलावा प्रत्यक्ष तौर पर भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें खास मेहमानों को आमंत्रित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) भी शामिल होंगे. वह बताएंगे कि यह अवॉर्ड उनके लिए क्या मायने रखता है. (इनपुट: भाषा)


Source link

Leave a Comment

Recent Posts

Advertisement

This website uses cookies.