Advertisement
Categories: देश

बिहार चुनाव : इस बार दिलचस्प स्थिति, मुख्यमंत्री पद के लिए 06 दावेदार | patna – News in Hindi

वैसे तो बिहार के चुनाव हमेशा ही दिलचस्प और उलटफेर वाले होते हैं लेकिन पहली बार कई दशकों में ऐसा हो रहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव से पहले एक दो नहीं बल्कि 06 दावेदार हैं. पांच साल पहले जब बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए थे तो नीतीश को छोड़ मुख्यमंत्री पद के किसी दावेदार की तस्वीर साफ नहीं थी लेकिन इस बार मामला ही अलग है.

पिछली बार जब चुनाव हुए थे, तो जेडीयू ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इस गठबंधन की जीत हुई थी. बीजेपी ने वो चुनाव लोजपा और अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर लड़ा, लेकिन बीजेपी के गठबंधन ने चुनाव से पहले अपना सीएम चेहरा साफ नहीं किया था. इस बार बिहार चुनाव में दो नहीं बल्कि 04 गठबंधन हैं.

चार गठबंधन हैं चुनाव मैदान में
इस नीतीश कुमार चुनाव से पहले से एनडीए के सीएम चेहरा हैं. जेडीयू और बीजेपी मिलकर चुनाव लड़ रही हैं. हालांकि बहुत से लोगों का मानना है कि बीजेपी साथ मिलकर चुनाव जरूर लड़ रही है लेकिन उसने गुपचुप दांव लोजपा के चिराग पासवान पर भी लगा रखा है.ऐसे में ये देखना दिलचस्प हो जाता है कि नीतीश कुमार के अलावा मुख्यमंत्री पद के जो अन्य पांच दावेदार हैं, वो कौन हैं और उनकी ताकत कितनी है. चुनाव में उनकी पार्टियां या गठबंधन क्या कमाल कर सकते हैं.

बिहार चुनावों में नीतीश कुमार सबसे कद्दावर और अनुभवी नेता हैं. वो एनडीए का सीएम चेहरा हैं

बीजेपी और जेडीयू के साथ हम और वीआईपी का गठबंधन एनडीए के तले तो है राजद और कांग्रेस महागठबंधन में. इसमें तेजस्वी सीएम पद का चेहरा हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने छह दलों को मिलाकर बने ग्रांड डेमोक्रेटिक सेकुलर एलायंस बनाया है. इसमें सीएम चेहरा वो खुद हैं.

ये भी पढ़ें – 88 साल पहले आज ही टाटा ने इस शख्स के साथ मिलकर शुरू की थी देश की पहली विमान सेवा

प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन की ओर जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव सीएम के दावेदार हैं तो एकदम नई पार्टी प्लुरल्स की पुष्पम प्रिया चौधरी ने भी खुद को बिहार के मुख्यमंत्री की गद्दी का दावेदार घोषित कर रखा है. इनके बीच छठे सीएम दावेदार लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान हैं.

नीतीश सबसे कद्दावर और अनुभवी
नीतीश कुमार बिहार के मौजूदा सीएम हैं. बिहार की सियासत में उनका कद लगातार बड़ा होता गया है. उनके पास एक लंबा अनुभव भी है. वो केद्र में मंत्री रहे हैं और चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

पहली बार 03 से 10 मार्च 2000 केवल 07 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने. फिर 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक इस पद रहे. इसके बाद 26 नवंबर 2010 से 17 मई 2014 तक सीएम रहे. फिलहाल वो 22 फरवरी 2015 से इस कुर्सी पर हैं.

नीतीश ने पहली बार 1985 में बिहार विधानसभा का चुनाव जीता था. हालांकि विधानसभा से ज्यादा वो लोकसभा के चुनाव लड़ चुके हैं और चुने जाते रहे हैं.केंद्र में वो हालांकि कई महकमों में रहे लेकिन उनका रेल मंत्री के रूप में कार्यकाल खासतौर पर याद किया जाता है. मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने बिहार की सत्ता पर मजबूत साबित की. हालांकि इस बार का चुनाव उनके लिए शायद आसान नहीं.

तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा हैं. (फाइल फोटो)

तेजस्वी के पास अनुभव कम और चुनौती ज्यादा
पिछली बार जब जेडीयू और आरजेडी का गठबंधन सत्ता में आय़ा था तो उसमें नीतीश मुख्यमंत्री बने तो लालू यादव के बेटे तेजस्वी उपमुख्यमंत्री. लेकिन इस पद पर उनका कार्यकाल छोटा रहा, क्योंकि ये गठबंधन टूट गया. तब तेजस्वी सड़क और भवन महकमे के भी मंत्री थे. तेजस्वी जनता के बीच पहचान तो बना चुके हैं लेकिन पिता के बगैर पहली बार चुनाव मैदान में कूद रहे हैं. चुनौती तो उनके लिए भी कतई आसान नहीं लेकिन अगर आरजेडी गठबंधन ने बेहतर किया तो वो इस गद्दी पर पहुंच सकते हैं.

ये भी पढ़ें – क्यों और कैसी है साइकोलॉजिकल ट्रेनिंग, जो कश्मीर में आर्मी को दी जा रही है

कुशवाहा में कितना है दम
विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले तक उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में थे. वो केंद्र में मंत्री भी बने.
लेकिन बिहार की राजनीति ने उन्हें इस गठबंधन से अलग किया. उनका सियासी करियर भी लंबा है. उन्होंने कई दलों को साथ लेकर ग्रांड डेमोक्रेटिक सेकुलर एलायंस बनाया है. 2013 में उन्होंने रालोसपा का गठन किया. पहली बार वो सीधे किसी गठबंधन की अगुवाई कर रहे हैं. हालांकि वो कितना उलटफेर कर पाएंगे ये देखने वाली बात होगी.

आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने इस चुनावों में कई दलो को साथ लेकर ग्रांड डेमोक्रेटिक सेकुलर एलायंस बनाया है.

पप्पु यादव भी हैं सीएम दावेदार
कोई चार साल पहले पप्पू यादव ने अपनी नई पार्टी बनाई थी, नाम है जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक). उनका सियासी करियर करीब तीन दशकों का है. पहली बार वो बिहार में सीधे अपने बनाए एक गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में कूद रहे हैं. वो इस गठबंधन के मुख्यमत्री चेहरा हैं. हालांकि उनका गठबंधन कितनी सीटें जीत पाएगा, इस पर लोग सवाल खड़े करते हैं.

ये भी पढ़ें – दुनिया के बड़े शहरों ने कैसे किया वायु प्रदूषण पर काबू, शहर की आबोहवा हुई शुद्ध

चिराग पासवान की नजर भी सीएम कुर्सी पर
लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान को उनके पिता ने पार्टी की कमान सौंप दी थी. चुनाव से पहले सीटों को लेकर उनके तेवर तीखे नजर आए. उनकी बयानबाजी और नीतीश पर सियासी हमलों के बाद हालत ये हो गई कि उन्हें इस चुनाव में एनडीए से अलग होना पड़ा. हालांकि उनके और बीजेपी के रिश्तों को लेकर काफी अटकलें लग रही हैं. लेकिन चिराग बिहार में सभी सीटों पर लोजपा प्रत्याशी खड़े कर रहे हैं. उनकी पार्टी की टिकट पर बीजेपी से आए कई नेता भी चुनाव लड़ रहे हैं.

ये भी पढे़ं – प्लूटो के पर्वतों पर पृथ्वी से कितनी अलग तरह से बनती है खास ‘बर्फ’

चिराग युवा हैं. तेजतर्रार भी. हालांकि ये चुनाव उनकी परख भी होगा कि क्या वाकई उनकी पार्टी उतनी दमदार है, जितने दावे वो करते रहे हैं. लेकिन उन्होंने ठीक ठाक संख्या में सीटें पाईं तो बिहार की राजनीति में केंद्र बिंदू भी बन सकते हैं.

चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी इस बार किसी गठबंधन की बजाए खुद चुनाव लड़ रही है. वैसे चिराग पर सबकी नजर भी है.

पुष्पम प्रिया चौधरी ने रातोंरात पार्टी बनाई और सीएम दावेदार भी बनीं
चुनाव से ठीक पहले पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार में नई पार्टी बनाई प्लुरल्स पार्टी. इसके बड़े बड़े विज्ञापन अखबारों में छपे. उनका नाम भी इस चुनाव से पहले ही लोगों ने जाना.

प्लूरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी पढ़ी-लिखी महिला हैं. उनका टि्वटर हैंडल देखें तो यह भी पता चलता है कि उन्हें 5 भाषाएं आती हैं. मैथिली, हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी के अलावा वह फ्रेंच भी बोल-समझ लेती हैं.

वो जदयू के पूर्व एमएलसी विनोद चौधरी की पुत्री हैं. मार्च, 2020 में राजनीति में उतरीं और नई पार्टी बना डाली. वो विश्व प्रसिद्ध लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री लेकर लौटी हैं.
दरभंगा की रहने वाली पुष्पम मीडिया में लगातार सुर्खियों में हैं. पंख लगा हुआ घोड़ा इनकी पार्टी का लोगो है. उनका दावा है कि वो बिहार के विकास को पंख लगा देंगी.


Source link

Leave a Comment
Advertisement

This website uses cookies.