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प्याज की बढ़ती कीमतों पर तुरंत एक्शन में आई सरकार, लगाम लगाने के लिए कसी कमर | business – News in Hindi

नई दिल्ली. देश में प्याज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र के साथ साथ राज्य सरकारों ने भी कदम उठाए हैं. प्याज की कीमत इस समय खुदरा में 60 रुपए किलो है. वहीं, थोक में इसकी कीमत 20 25 रुपए है. दोगुनी तेजी से प्याज के दाम में बढ़ोत्तरी होने की मुख्य वजह फसल खराब होना, सप्लाई में कमी या फिर इसकी जमाखोरी होती है. देश के सबसे बड़े थोक प्याज बाजार नासिक में प्याज़ के भाव अचानक आसमान छूने लगे. जिसके बाद नासिक, पुणे और औरंगाबाद के 110 आयकर अधिकारियों की 18 टीमों ने बुधवार दोपहर 3 बजे नासिक जिले के 12 प्याज व्यापारियों के आवासों और कार्यालयों पर खोज शुरू कर दी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लासालगांव, पिंपलगांव और नासिक शहर में व्यापारी होर्डिंग और कालाबाजारी का सहारा ले रहे हैं. यह कार्रवाई लासलगांव में प्याज की कीमतों में लगातार वृद्धि के मद्देनजर हुई है. हर साल त्योहारों से पहले सितंबर से लेकर नवंबर तक प्याज की कीमतें आसमान छूने लगती है. प्याज का मसला ऐसा हो चुका है कि सरकारें तक चिंताग्रस्त हो जाती हैं. कई मौकों पर प्याज की कीमतें राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं. इसलिए सरकार कोशिश में रहती है कि प्याज की कीमतों को काबू में रखा जाए. लेकिन फिर भी हर साल इस सीजन में प्याज की कीमतें बेकाबू हो जाती हैं.

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जानिए क्यों बढ़ती घटती हैं प्याज की कीमत>> मानसून के देरी से आने से फसल पर काफी असर पड़ता है. मानसून की देरी और फिर तेज बारिश ने प्याज की फसलों का नुकसान किया. जिसकी वजह से इसकी कीमतों में तेजी देखी गई.

>> ज्यादा बारिश ने प्याज की फसलों को नुकसान पहुंचाया. प्याज उपजाने वाले राज्य कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून में तेजी रही. ज्यादा बारिश की वजह से प्याज का उत्पादन प्रभावित हुआ. कम उत्पादन की वजह से प्याज की कीमतों में तेजी आई.

>> बाढ़ और सुखा के अलावा प्याज की गैरकानूनी तरीके से होर्डिंग की वजह से भी प्याज की कीमतें बढ़ती हैं. हर साल त्योहारी सीजन से पहले जमाखोर प्याज की जमाखोरी करने लगते हैं. जिसकी वजह से प्याज की कीमतें बढ़ जाती हैं. क्योंकि प्याज और आलू दोनों ही ऐसी फसल है जिसे आसानी से स्टोर कर के रखा जा सकता है.

>> मंडी में आने वाली सब्जियों की आवक यानी सप्लाई में कमी के कारण भी दाम तीन गुना से ज्यादा हो जाते हैं. क्योंकि ऐसे समय में सप्लाई तो कम होती है पर डिमांड में कमी नहीं होती.

>> प्याज के उचित स्टोरेज से उसकी कीमतों पर अंकुश रखा जा सकता है. लेकिन भारत में प्याज के भंडारण में दिक्कते हैं. एक आंकड़े के मुताबिक भारत में सिर्फ 2 फीसदी प्याज के भंडारण की ही क्षमता है. 98 फीसदी प्याज खुले में रखा जाता है. बारिश के मौसम में नमी की वजह से प्याज सड़ने लगता है. प्याज की बर्बादी की वजह से भी इसकी कीमतें बढ़ती हैं.

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तीन सीजन में होती है प्याज की खेती
भारत में प्याज की खेती के तीन सीजन है. पहला खरीफ, दूसरा खरीफ के बाद और तीसरा रबी सीजन. खरीफ सीजन में प्याज की बुआई जुलाई अगस्त महीने में की जाती है. खरीफ सीजन में बोई गई प्याज की फसल अक्टूबर दिसंबर में मार्केट में आती है. प्याज का दूसरे सीजन में बुआई अक्टूबर नवंबर में की जाती है. इनकी कटाई जनवरी मार्च में होती है. प्याज की तीसरी फसल रबी फसल है. इसमें दिसंबर जनवरी में बुआई होती है और फसल की कटाई मार्च से लेकर मई तक होती है. एक आंकड़े के मुताबिक प्याज के कुल उत्पादन का 65 फीसदी रबी सीजन में होती है.


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