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जानिए GST परिषद की बैठक में राज्यों को समझाने में क्यों नाकाम रहीं वित्तमंत्री? | business – News in Hindi

राज्यों को समझाने में क्यों नाकाम रहीं वित्तमंत्री?

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने 12 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों और केंद्र सरकार और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. वित्तमंत्री ने बैठक में कहा कि केंद्र सरकार बाजारों से कर्ज नहीं उठा सकती. केंद्र सरकार ने राज्यों को ही बाजारों से कर्ज उठाने को कहा है. इसके लिए सरकार ने 20 राज्यों को खुले बाजार उधार के माध्यम से अतिरिक्त 68,825 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमति दी है. लेकिन विपक्षी राज्यों ने केंद्र की इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया है. आइए जानते हैं आखिर विपक्षी राज्यों की मांग क्या है और क्षतिपूर्ति मुद्दे पर क्यों नहीं बन पाई बात?

आम सहमति पर नाकाम रही केंद्र सरकार
सरकार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, जिन राज्यों ने वस्तु और सेवा कर (GST) के राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा सुझाए गए दो विकल्पों में से विकल्प 1 को चुना है उन्हें सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 0.5 प्रतिशत पर अतिरिक्त उधार की अनुमति दी गई है. वहीं, बैठक में वित्तमंत्री ने कहा था कि राज्यों से क्षतिपूर्ति मुद्दे पर आम सहमति पर पहुंचने में नाकाम रहे हैं. केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अपील है कि उन सभी राज्यों को जल्द से जल्द जवाब देना होगा जो कोविड-19 से जंग लड़ रहे हैं और जिन्हें पैसे की जरूरत है.

क्या है क्षतिपूर्ति का मुद्दाकोरोनावायरस के कारण देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस कारण देश में राज्यों से होने वाले जीएसटी कलेक्शन में बड़ी कमी आई है. जीएसटी एक्ट के तहत राज्यों को 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी लागू होने के पहले पांच वर्षों में राजस्व के किसी भी नुकसान के लिए भुगतान प्राप्त करने की गारंटी दी गई थी. वहीं, 2015-16 के आधार वर्ष में राज्यों द्वारा जीएसटी संग्रह में 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की कमी की गणना की गई है. राज्यों ने राजस्व कमी को पूरा करने के लिए साल 2022 तक क्षतिपूर्ति करने का वादा किया है.

क्या केंद्र राज्यों को उनका बकाया नहीं दे रहा है?
कोविड-19 की वजह से देशभर में आर्थिक गतिविधियों में गतिरोध की स्थिती पैदा हुई है. ऐसे में अर्थव्यस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए और क्षतिपूर्ति के मुद्दे को हल करने के लिए वित्तमंत्री की अध्यक्षता में 27 अगस्त को एक बैठक हुई थी. उस वक्त बैठक में वित्तमंत्री ने उधारी के लिए राज्यों के सामने दो विकल्पों का प्रस्ताव रखा था. पहला जिसमें सभी राज्यों को आरबीआई की स्पेशल विंडो से 97 हजार करोड़ रुपये उधार लेने को कहा था. वहीं, राज्यों को बाजारों से 2.35 लाख करोड़ रुपये उधार लेने के दूसरे विकल्प को रखा था. लेकिन अब उधार की इस राशि को संशोधित कर क्रमशः 1.10 लाख करोड़ रुपये और 1.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

राज्यों को क्यों मंजूर नहीं प्रस्ताव
बता दें कि वित्तमंत्री के इस प्रस्ताव पर केवल 20 राज्यों ने क्षतिपूर्ति घाटे को पूरा करने के लिए विकल्प 1 (Option-1) पर सहमति जताई है. वहीं, बाकी राज्यों ने केंद्र सरकार के दोनों विकल्पों को सिरे से नकार दिया है. इन राज्यों ने सरकार पर तीसरा विकल्प रखने पर जोर डाला है. जिसमें केंद्र सरकार राज्यों के लिए उधार लेगी क्योंकि इन राज्यों ने महसूस किया कि उनकी ‘बैलेंस शीट’ पर क्षतिपूर्ति अंतर को पूरा करने के लिए ऋण लेना भविष्य में उनकी उधार क्षमता को सीमित कर सकता है. विपक्षी राज्यों ने कहा है कि केंद्र राज्यों को क्षतिपूर्ति प्रदान करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य है और वह राज्यों को उधार लेने के लिए नहीं कह सकता है.


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