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क्या है इंडिया का BR प्लान, जिससे घबरा रहे हैं चीन और पाकिस्तान? | knowledge – News in Hindi

युद्ध या सीमा पर किसी भी किस्म की हिंसा (Border Conflict) की स्थिति में भारत के BR प्लान से चीन और पाकिस्तान में एक डर बैठा हुआ है. तकरीबन पांच महीनों से लद्दाख में बॉर्डर पर तनाव (Border Tension) के हालात बने हुए हैं और भारत व चीन के बीच उच्च सैन्य स्तर (High Level Dialogue) की कई राउंड की वार्ताएं अब तक खास रंग नहीं लाई हैं. समझा जा सकता है कि 100 से ज़्यादा दिन हो जाने के बाद भी बॉर्डर पर चीन ने दूसरी बार हमला करने या किसी तरह की हिंसात्मक गतिविधि करने से परहेज़ क्यों बरता है.

इसी हफ्ते चुशूल (Chushul) में भारतीय सीमा में हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता सातवीं बार हुई. इस वार्ता में फिर सीमा पर शांति बनाने की कोशिशों पर चर्चा हुई लेकिन इससे ठीक पहले देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने चीन और पाकिस्तान की साज़िशों को लेकर कड़ा बयान दिया. चीन पर खास एजेंडे के तहत विवाद को बढ़ाने की बात कहते हुए सिंह ने साफ कहा कि LAC पर तनाव बढ़ाने के पीछे चीन का सीक्रेट मिशन है और चीन के इस मिशन से युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

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अब सवाल यह है कि युद्ध की स्थिति में भारत के किस प्लान के चलते चीन और पाकिस्तान को बहुत सोच समझकर इस दिशा में कदम बढ़ाने होंगे? भारत के इस BR प्लान को गंभीरता से जानने की ज़रूरत है.

न्यूज़18 इलस्ट्रेशन

क्या है देश का BR प्लान?
चीन के साथ युद्ध की स्थिति में आर्मी और वायु सेना ही प्रमुख रोल में होंगे. चीन के इशारे पर अगर दूसरी तरफ से पाकिस्तान किसी हमले की योजना बनाता है तो भी यही दोनों सेनाएं अहम भूमिका निभाएंगी. इन दोनों सेनाओं ने दोनों दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए BR प्लान तैयार कर लिया है. B का मतलब भीष्म टैंकों से है और R का अर्थ राफेल फाइटर जेट से है.

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अब यह केवल शब्दों की जोड़ तोड़ का प्लान नहीं है बल्कि इसकी रणनीतिक अहमियत समझने लायक है. खबरों की मानें तो 15 से 17 हज़ार फीट के अल्टिट्यूड पर भारतीय सेना ने लद्दाख में भीष्म टैंक तैनात कर दिए हैं. ये भी बताया जा चुका है कि ये टैंक चीनी टैंकों की तुलना में ज़्यादा सक्षम और कारगर हैं. इस तैनाती से संकेत साफ है कि चीन ने युद्ध छेड़ा तो उसे करारा जवाब मिलेगा और इसके लिए वही ज़िम्मेदार होगा.

चीन भले ही अपने T-63 और T-99 टैंकों पर इतराए लेकिन वो भी समझ चुका है कि इनके बूते वह भारत के टैंंकों से लोहा लेगा तो मुंह की खानी पड़ सकती है. दूसरी तरफ, R प्लान के साथ वायु सेना पूरी ताकत से तैयार है. चीन ही नहीं, इससे पाकिस्तान के भी पसीने छूटे हुए हैं. जी हां, पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा पहले ही राफेल को लेकर अपनी घबराहट ज़ाहिर कर चुके हैं. बाजवा ने कहा था कि भारत राफेल के दम पर पाकिस्तान के खिलाफ भयंकर सैन्य गतिविधि की तैयारी कर रहा है.

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भारत के पास प्लान B भी है
जी हां, भीष्म टैंक और राफेल के अलावा, भारतीय वायु सेना और आर्मी तमाम आधुनिक हथियारों से तो लैस है ही. साथ ही, पिछले एक महीने के भीतर 10 मिसाइलों के टेस्ट करके भारत ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि चीन और पाकिस्तान की तरफ से कोई ब्लैकमेलिंग मंज़ूर नहीं की जाएगी. किसी भी हिंसा के जवाब में पुरज़ोर एक्शन लिया जा सकता है.

आखिर क्यों फेल हो रही हैं वार्ताएं?
भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की वार्ताओं के फेल होने के पीछे बताया जा रहा है कि चीन की चालबाज़ी है. चीन ठंड के मौसम तक बात को खींचना चाहता है. ठंड के मौसम में लद्दाख में चूंकि बर्फबारी के कारण स्थितियां काफी कठिन हो जाती हैं इसलिए चीन तब भारत को बैकफुट पर देखना चाहता है.

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी लद्दाख में पैंगोंग लेक के पास हर 15 दिनों में रोटेशनल ढंग से सैनिकों की तैनाती कर रही है. लेकिन भारत ने भी यहां अतिरिक्त बिग्रेड की तैनाती कर दी है. बहरहाल, इन विश्लेषणों की मानें तो युद्ध की स्थिति में भारत का पलड़ा ही भारी रहने वाला है.


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