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कौन हैं अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के आर्किटेक्ट प्रोफेसर अख्तर?

राम मंदिर के बाद अब मस्जिद का डिजाइन भी सामने आ चुका है. अयोध्या के धनीपुर गांव में प्रस्तावित मस्जिद पारंपरिक शैली से अलग काफी आधुनिक होगी, जिसमें मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और लाइब्रेरी भी रहेगी. डिजाइन सामने आने के साथ ही इसके वास्तुविद का नाम भी चर्चा में है. प्रोफेसर सैयद मोहम्मद अख्तर नाम का ये शख्स वास्तुकला की दुनिया का जाना-माना नाम है.

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ने हाल ही में मस्जिद का मॉडल जारी किया. पांच एकड़ की इस जमीन पर दो इमारतें होंगी, जिनमें मस्जिद और अस्पताल शामिल हैं. इनका डिजाइन बनाने वाले प्रोफेसर अख्तर जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) यूनिवर्सिटी में आर्किटेक्चर विभाग के प्रमुख रह चुके हैं.

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अयोध्या में नक्शा बनाने से पहले प्रोफेसर अख्तर जामिया की टीटीई बिल्डिंग के अलावा, दिल्ली में डिफेंस कॉलोनी में शेख अली के मज़ार, अरब की सराय में सैयद यासीन के मज़ार और मस्जिद जैसे कई निर्माण कार्य करवा चुके हैं.

प्रोफेसर सैयद मोहम्मद अख्तर नाम का ये शख्स वास्तुकला की दुनिया का जाना-माना नाम है

वास्तुविद होने के साथ-साथ प्रोफेसर अख्तर ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर काफी रिसर्च की है और इसलिए ही उन्हें डी-लिट की उपाधि मिल चुकी है. विकास का यही मॉडल प्रस्तावित मस्जिद में भी दिखता है. इसमें पारंपरिक शैली की हटाते हुए एकदम मॉडर्न नक्शा तैयार हुआ है, जिसमें मस्जिद के अंडाकार डिजाइन में कोई गुम्बद नहीं है. मस्जिद में बिजली की बजाए सोलर पावर की व्यवस्था होगी ताकि ये ग्रीन मॉडल की तरह काम कर सके. ये प्रोफेसर अख्तर के सस्टेन करने वाले मॉडल के अनुरूप ही है.

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लंबे-चौड़े विवाद के बाद आखिरकार मंदिर के बाद मस्जिद का नक्शा भी तैयार हो चुका है. बता दें कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 9 नवंबर को अयोध्या में विवादित स्थल पर एक राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया था और केंद्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ का एक वैकल्पिक भूखंड आवंटित करने का निर्देश दिया था.

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तो जाहिर है ऐसी विवादास्पद प्रॉपर्टी को नया रूप देने में जुटे इस वास्तुविद के भी कई मॉडर्न पहलू हैं. प्रोफेसर अख्तर हमेशा से ही नई शुरुआत पर यकीन करते रहे. उन्होंने ही जामिया में आर्किटेक्टर विषय की शुरुआत करवाई. यहां पर अपने 4 कार्यकाल के दौरान वे कई दूसरे विषयों में भी हाथ डालते रहे. र्किटेक्चर पेडागॉजी, आर्क बिल्डिंग सर्विसेज़, आर्क मेडिकल आर्किटेक्चर, आर्क रिक्रिएशन आर्किटेक्चर, आर्क अर्बन रीजनरेशन जैसे विषयों में मास्टर्स के प्रोग्राम भी उन्हीं ने तैयार करवाए. ये सारे ही प्रोग्राम काफी आधुनिक और पेशेवर आयामों के कारण काफी लोकप्रिय हैं.

परिसर में ऐसी व्यवस्था होगी कि मस्जिद में एक साथ 2000 लोग नमाज पढ़ सकें- सांकेतिक फोटो (pixabay)

प्रोफेसर अख्तर के दिशानिर्देश में बने नक्शे के मुताबिक, मस्जिद कैम्पस 1700 वर्ग मीटर से ज्यादा के क्षेत्र को कवर करेगा. इसमें आगे की तरफ दो मीनार और एक स्किलेट ग्लास गुंबद होगा. साथ ही 200-बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी होगा. इतने ही बड़े परिसर में ऐसी व्यवस्था की गई है कि मस्जिद में एक साथ 2000 लोग नमाज पढ़ सकें.

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स्कॉलर रह चुके इस वास्तुविद ने मस्जिद में लाइब्रेरी और पब्लिकेशन हाउस को भी जगह दी है. यहां रिसर्च और इंडो इस्लामिक कल्चरल-लिटरेचर स्टडीज का प्रकाशन होगा, साथ ही बैठकर पढ़ा भी जा सकेगा. वैसे बता दें कि केवल वास्तु ही नहीं, बल्कि विषय से इतर भी प्रोफेसर अख्तर ने काफी ज्ञान बटोरा है. वे आर्किटेक्चर और पर्यावरण पर कई किताबें और लेख, शोध पत्र एवं वक्तव्य दे चुके हैं. इस तमाम लेखन के अलावा उनकी कविताओं की भी एक किताब ‘बर्फ पर जमी आग’ भी प्रकाशित हो चुकी है.


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