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केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब करने जा रहा ये काम, बन जाएगा पहला राज्‍य | chandigarh-punjab – News in Hindi

मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार किसानों का समर्थन कर रही है.

नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए 3 कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ अभी भी किसानों का विरोध प्रदर्शन (Farmers Agitation) जारी है. कृषि कानूनों के खिलाफ सर्वाधिक नाराजगी पंजाब (Punjab) के किसानों में देखने को मिल रही है. पंजाब सरकार भी इस मुद्दे पर किसानों का समर्थन कर रही है. इस बीच पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के इन कृषि कानूनों को पूरी तरह से खारिज करने का फैसला किया है. इससे पंजाब और हरियाणा में सियासी पारा बढ़ा दिया है.

जानकारी दी गई है कि इन कृषि कानूनों को खारिज करने के लिए 19 अक्‍टूबर को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित होगा. पंजाब के मंत्रिमंडल ने यह फैसला मिलकर लिया है. इस फैसले के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ ऐसा करने वाला पंजाब देश का पहला राज्‍य हो जाएगा. कृषि कानूनों के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस पंजाब में एक ही रुख अपनाए हुए हैं. ऐसे में विधानसभा में इन कानूनों को खारिज करने के लिए समर्थन मिलना संभव है.

वहीं पंजाब के किसान संगठनों ने बुधवार को नए कृषि कानूनों पर आंशकाओं के निराकरण के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा बुलाई गई एक बैठक का बहिष्कार किया और सरकार पर दोहरी चाल चलने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि बैठक में कोई मंत्री उनकी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं था. जोगिंदर सिंह के नेतृत्व वाली भारती किसान संघ सहित, 29 किसानों के संगठनों, के प्रतिनिधि बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और उनके सहयोगी किसी मंत्री के उपस्थिति न होने से नाराज हो गए.

किसी भी विरोध प्रदर्शन से बचने के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच यह बैठक कृषि भवन में बुलाई गई थी. बैठक के बाद, उत्तेजित किसान प्रतिनिधियों को नारे लगाते तथा कृषि भवन के बाहर नए कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ते हुए देखा गया. किसान प्रतिनिधियों के बैठक से वॉक आउट करने के बाद कुछ ही देर में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस पर प्रतिक्रिया दी. दोनों नेताओं ने मंत्री की गैरमौजूदगी को ‘अन्नदाताओं का अपमान’ करार दिया.

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार को किसानों के घाव पर नमक छिड़कने वाला और उनके प्रति दुर्भावना रखने वाला बताया. वहीं बादल ने इसे पंजाब के लोगों, और किसानों की बुद्धिमता का अपमान करार दिया. बैठक में भाग लेने बस में आये 30 से अधिक प्रतिनिधि, जिनमें ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक थे, को कोविड-19 महामारी के बावजूद चेहरे पर मास्क नहीं पहने देखा गया.


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