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एक चमत्कारिक अविष्कार या आपदा की घंटी?

प्लास्टिक आप और आपके बच्चे दोनों के लिए ही घातक है.

दुनिया परस्पर बदलाव से गुज़रती रही है. जनजीवन आसान करने के अनेकोनेक खोज व अविष्कार आए दिन होते ही रहते हैं. बेहतर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ सामान्य जीवन लगातार विकसित हो रहा है. इसी नए दौर में हमारे जीवन में आई पॉलीथिन (Polythene) जो की धीरे-धीरे हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ती चली गई. एक व्यक्ति औसतन दो से तीन पॉलीथिन का उपयोग हर रोज़ करता है.

पॉलीथिन का अविष्कार एक एक्सीडेंट था. एथिलीन और बेंज़ैल्डिहाइड के उच्च दवाब से गुजरने पर पॉलीथिन का निर्माण होता है. यह विश्व का सबसे अधिक प्रयोग किए जाने वाले प्लास्टिक हैं. पॉलीथिन इंडस्ट्री हर एक स्तर पर हमारे जीवन में अपना वर्चस्व बनाए हुए है. अच्छी टेंसिल स्ट्रेंथ और वाटरप्रूफ होने के कारण इसका प्रयोग चहुंओर बढ़ता ही जा रहा है.

ध्यान देने वाली बात यह है कि पॉलीथिन एक नॉन-बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है जो कई वर्षों तक गल नहीं सकता. इसी कारण यह हमारे पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा है. अगर हम एक नज़र घुमा कर अपनी आस पास की चीज़ों को देखें तो लगभग दस ऐसी चीज़ें दिख ही जाएंगी जो प्लास्टिक की बनी हों. इससे हम यह पता लगा सकते हैं कि यह किस कदर हमारे जीवन में अन्तर्निहित है. इस संकट की घड़ी में जब सारा विश्व कोरोना वायरस से जद्दोजहद कर रहा है, ऐसे में एक और खतरे की घंटी साथ में बज रही है जिसका नाम है मेडिकल प्लास्टिक कचरा जो पीपीई. किट और ग्लव्स के कारण दुनियाभर में एकत्रित हो रहा है.

पॉलीथिन और प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग के चलते सारे विश्व में प्लास्टिक कचरे की एक बड़ी मात्रा इकट्ठी हो गई है जो ना ही जलाई जा सकती है ना ही गलाई जा सकती है. तथ्यों के आधार पर, औसत व्यक्ति हर साल 70,000 माइक्रोप्लास्टिक्स खाता है. पिछले 50 वर्षों में, विश्व प्लास्टिक उत्पादन दोगुना हो गया है.

हालांकि कई वैज्ञानिक इस कचरे से ईंट और रीयुजबल शीट्स बनाकर इसका प्रबंधन कर रहे हैं. मगर रोज़मर्रा के जीवन में आम जनता द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पॉलीथिन के कारण, प्लास्टिक कचरा दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. सरकार द्वारा आए दिन पॉलीथिन बैग्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है और जूट या पेपर बैग्स को बढ़ावा दिया जा रहा है. कुछ देशों में तो प्लास्टिक का प्रयोग ग़ैरकानूनी कर दिया गया है. लेकिन यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं प्रत्येक नागरिक की बनती है कि वह पॉलीथिन नामक खतरे से सजग रहे एवं उचित दिशानिर्देशों का पालन करे. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)


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